भारतीय रेलवे, जिसे राष्ट्र की जीवन रेखा कहा जाता है, ने हाल ही में स्लीपर और एसी कोचों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्री ही इन कोचों में यात्रा कर सकेंगे। इस नए नियम का उद्देश्य यात्रियों को अधिक आरामदायक और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव प्रदान करना है।

टिकट चेकिंग में नया तरीका

भारतीय रेलवे ने पिछले महीने पश्चिमी रेलवे में अपने सभी टिकट-चेकिंग स्क्वाड को भंग कर दिया और उन्हें सीधे ट्रेनों पर तैनात कर दिया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को ही यात्रा करने की अनुमति दी जा सके। प्लेटफार्म पर अब यात्रियों को यह सुनिश्चित करने के लिए जांच की जा रही है कि उनके पास कन्फर्म टिकट हो।

नियमों का पालन

इस नई व्यवस्था के तहत, स्लीपर और एसी कोचों में यात्रियों की भीड़भाड़ कम हो रही है। यात्रियों को अब आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल रहा है, क्योंकि बिना कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने की अनुमति नहीं है। यह बदलाव यात्रियों के लिए एक नया अनुभव लेकर आया है, जो पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक है।

जुर्माना और दंड

नए नियमों के अनुसार, बिना कन्फर्म टिकट के यात्रा करने वाले यात्रियों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। यदि कोई यात्री प्रतीक्षारत टिकट के साथ एसी कोच में यात्रा करता है, तो उसे 440 रुपये का जुर्माना और अगले स्टेशन तक का किराया देना होगा। स्लीपर कोचों में जुर्माना 250 रुपये + फुल किराया है।

दीर्घकालिक समाधान: सामान्य कोचों की संख्या बढ़ाना

भीड़भाड़ की समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए, भारतीय रेलवे अगले दो वर्षों में 10,000 गैर-एसी कोचों को पेश करने की योजना बना रहा है। इसमें 5,300 से अधिक सामान्य कोच शामिल हैं, जो लंबी दूरी के यात्रियों के लिए कन्फर्म टिकटों की उपलब्धता को बढ़ाएंगे और समस्या सही में सुलझेगी.

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