योगासन का इतिहास प्राचीन काल से चला आ रहा है और आज के समय में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है। आधुनिक जीवनशैली में अनियमित खान-पान और तनाव के कारण पेट की गैस्ट्रिक समस्याएँ आम हो गई हैं। पवनमुक्तासन, जिसे अंग्रेजी में Wind-Relieving Pose कहा जाता है, विशेष रूप से पेट की गैस और अन्य गैस्ट्रिक समस्याओं से राहत देने के लिए अत्यधिक प्रभावी है। आइए विस्तार से जानते हैं पवनमुक्तासन के बारे में, इसके करने की विधि, इसके लाभ और सावधानियों के बारे में।

 

पवनमुक्तासन की विधि

पवनमुक्तासन को सही तरीके से करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

  1. शुरुआत की स्थिति:
    • सबसे पहले योग मैट पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। अपने पैरों को सीधा रखें और हाथों को शरीर के पास रखें।
  2. दाहिने घुटने को मोड़ना:
    • अपने दाहिने घुटने को धीरे-धीरे मोड़ें और इसे अपनी छाती की ओर लाएं। दोनों हाथों से घुटने को पकड़ें और पेट पर दबाव डालें। सिर को स्थिर रखें और श्वास सामान्य रखें।
  3. स्थिति में बने रहना:
    • इस स्थिति में 10-15 सेकंड तक रहें। श्वास को सामान्य रखते हुए इस स्थिति का आनंद लें। इससे पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ेगा और गैस निकालने में मदद मिलेगी।
  4. छोड़ना:
    • धीरे-धीरे दाहिने पैर को छोड़ें और सीधा कर लें। अब इसी प्रक्रिया को बाएं पैर के साथ भी दोहराएं।
  5. दोनों पैरों को साथ लाना:
    • अंत में, दोनों पैरों को एक साथ मोड़ें और छाती की ओर लाएं। दोनों हाथों से घुटनों को पकड़ें और पेट पर दबाव डालें। इस स्थिति में 10-15 सेकंड तक रहें और फिर धीरे-धीरे छोड़ दें।

 

 

 

पवनमुक्तासन के लाभ

पवनमुक्तासन के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, जो न केवल गैस्ट्रिक समस्याओं से राहत दिलाते हैं बल्कि सम्पूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य को भी सुधारते हैं। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  1. गैस्ट्रिक समस्याओं से राहत:
    • पवनमुक्तासन पेट में जमी हुई गैस को निकालने में मदद करता है। यह पेट की सूजन और अन्य गैस्ट्रिक समस्याओं को दूर करने में अत्यधिक प्रभावी है।
  2. पाचन सुधारता है:
    • इस आसन को नियमित रूप से करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और भोजन को पचाने में आसानी होती है।
  3. कब्ज से राहत:
    • पवनमुक्तासन पेट के अंगों को सक्रिय करता है और मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाता है, जिससे कब्ज की समस्या से राहत मिलती है।
  4. पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है:
    • इस आसन से पेट की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और पेट का आकार भी सुडौल बनता है।
  5. तनाव और चिंता को कम करता है:
    • योगासन मानसिक शांति प्रदान करते हैं। पवनमुक्तासन भी मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में सहायक है।

 

सावधानियाँ

हालांकि पवनमुक्तासन करने के कई लाभ हैं, लेकिन कुछ सावधानियों का पालन करना भी आवश्यक है:

  1. खाली पेट करें:
    • इस आसन को हमेशा खाली पेट करना चाहिए। भोजन के बाद कम से कम 3-4 घंटे का अंतराल होना चाहिए।
  2. सही विधि का पालन करें:
    • आसन को सही तरीके से और सही विधि का पालन करते हुए करें। गलत तरीके से करने से लाभ के बजाय हानि हो सकती है।
  3. गर्भवती महिलाएँ और रोगी:
    • गर्भवती महिलाओं और हाल ही में पेट की सर्जरी कराने वाले रोगियों को यह आसन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा किसी भी गंभीर रोग से पीड़ित व्यक्ति को इस आसन को करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

बिहार से हूँ। बिहार होने पर गर्व हैं। फर्जी ख़बरों की क्लास लगाता हूँ। प्रवासियों को दोस्त हूँ। भारत मेरा सबकुछ हैं। Instagram पर @nyabihar तथा lov@gulfhindi.com पर संपर्क कर सकते हैं।