सीरिया पर इसराइली एयरस्ट्राइक से मचा हड़कंप, 12 अरब और इस्लामिक देशों ने की कड़ी निंदा.

सीरिया के उत्तर-पश्चिम हिस्से में बने सैन्य एयरबेस पर इसराइली हमलों के बाद पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। 18 अगस्त और 19 अगस्त 2026 के दौरान हुए इन हमलों को लेकर कुल 12 अरब और इस्लामिक देशों ने मिलकर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद से खाड़ी देशों और सीरिया में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के मन में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
किन देशों ने उठाई आवाज और क्या है मामला
इस निंदा करने वाले देशों के समूह में Saudi Arabia, Egypt, Jordan, Qatar, Kuwait, United Arab Emirates और Pakistan जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। इन सभी देशों का साफ कहना है कि इस तरह से किसी भी देश की संप्रभुता पर हमला करना सरासर गलत है। वहीं दूसरी ओर इसराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के कार्यालय ने बयान जारी कर सफाई दी कि यह हमला एक एहतियाती कदम था। इसराइल का दावा था कि वे तुर्की की सेना को वहां तैनात होने से रोकना चाहते थे, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बिगड़ सकता था। इसराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने भी तुर्की के राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे कदम इसराइल की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।
सीरिया और तुर्की का पक्ष
सीरिया के विदेश मंत्री Asaad al-Shaibani ने इसराइली दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां पर तुर्की की कोई भी स्थायी सेना तैनात नहीं थी। एयरबेस पर मौजूद तुर्की के सैन्य अधिकारी केवल रूटीन ट्रेनिंग और ज्ञान साझा करने के लिए आए हुए थे। मंत्री ने यह भी बताया कि इस हमले से पहले ही दमिश्क ने इसराइली अधिकारियों को पूरी बात बता दी थी कि वहां कोई पक्की तैनाती नहीं की जा रही है। तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने भी इस इसराइली हमले को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बहुत बड़ा खतरा बताया और उनके बहानों को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही है कूटनीति
इराक और सीरिया के लिए अमेरिकी दूत Tom Barrack ने इस पूरी घटना पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने इस एयरस्ट्राइक को एक गैर-जरूरी तनाव बढ़ाने वाला कदम करार दिया। अमेरिका अब इस मामले को शांत करने के लिए तीनों देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है ताकि इलाके में और ज्यादा अशांति न फैले। 21 अगस्त 2026 तक इस मामले में कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत जारी है और अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस रंजिश का आगे चलकर क्या असर पड़ेगा।