रियाद में हुई एक बड़ी बैठक में कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समेत 13 देशों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर बताया कि ईरान नागरिक ठिकानों और तेल सुविधाओं को निशाना बना रहा है। यह बैठक 18 मार्च 2026 को आयोजित की गई थी। इन हमलों के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और प्रवासियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इन हमलों से किन ठिकानों को हुआ है नुकसान?

ईरान द्वारा किए गए हमलों में मुख्य रूप से ऊर्जा और पानी के प्लांट को निशाना बनाया गया है। इससे खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर सीधा असर पड़ रहा है। प्रवासियों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि वे इन औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में काम करते हैं।

  • कतर: रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमले से भारी नुकसान हुआ और वहां आग लग गई।
  • यूएई: हबशान गैस प्लांट और बाब तेल क्षेत्र को निशाना बनाने की कोशिश हुई जिसे एयर डिफेंस ने नाकाम कर दिया।
  • ओमान: ओमान की खाड़ी में एक जहाज पर मिसाइल से हमला हुआ जिससे उसमें आग लग गई।
  • सऊदी अरब: देश के पूर्वी हिस्से में चार ड्रोनों को मार गिराया गया है।

13 देशों ने सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए हैं?

सभी प्रभावित देशों ने अपनी सुरक्षा के लिए सख्त रुख अपनाया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगी है। इस मामले में अब तक की गई बड़ी कार्रवाइयां नीचे दी गई हैं। इन देशों ने साफ किया है कि वे अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।

देश या संस्था मुख्य कदम और बयान
संयुक्त राष्ट्र (UN) 136 देशों के समर्थन से ईरान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास किया गया।
अमेरिका (US) हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी मिसाइल ठिकानों पर हमला किया।
यूएई (UAE) अब तक 1,699 ड्रोन और 327 बैलिस्टिक मिसाइलें मार गिराने का दावा किया।
कतर (Qatar) हमले के विरोध में दो ईरानी राजनयिकों को देश से बाहर निकाल दिया।

बैठक में शामिल देशों ने साफ किया है कि उनके पास अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने ईरान से तुरंत हमले रोकने और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पालन करने को कहा है। इन हमलों से खाड़ी क्षेत्र में तेल की कीमतों और सप्लाई पर भी असर पड़ने की संभावना है।