Strait of Hormuz में ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर किए जा रहे हमलों और रास्ते को बंद करने की कोशिशों के खिलाफ दुनिया के 20 से ज्यादा देश एकजुट हो गए हैं। United Arab Emirates (UAE), ब्रिटेन, फ्रांस और जापान सहित इन देशों ने एक साझा बयान जारी कर ईरान की हरकतों की कड़े शब्दों में निंदा की है। इन देशों का कहना है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहा है जिससे समुद्री व्यापार और सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

साझा बयान में किन बातों पर जोर दिया गया है?

इस बयान में मुख्य रूप से ईरान द्वारा निहत्थे व्यापारिक जहाजों और तेल-गैस के बुनियादी ढांचों पर किए गए हमलों की आलोचना की गई है। शामिल देशों ने मांग की है कि ईरान तुरंत ड्रोन हमलों, मिसाइल हमलों और समुद्र में माइन्स बिछाने जैसी गतिविधियों को बंद करे। इन देशों ने United Nations Security Council के प्रस्ताव 2817 का पालन करने की भी बात कही है। समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक मौलिक अधिकार बताया गया है जिसे ईरान चुनौती दे रहा है।

समुद्री व्यापार और तेल की सप्लाई पर क्या असर पड़ा है?

Strait of Hormuz में जारी तनाव के कारण समुद्री यातायात में भारी गिरावट आई है। इसके कारण दुनिया भर में तेल की कीमतों पर असर पड़ने का डर है। रिपोर्ट के अनुसार इसकी ताजा स्थिति इस प्रकार है:

विवरण ताजा आंकड़े
शिपिंग क्रॉसिंग में कमी लगभग 95 प्रतिशत तक घटी
फंसे हुए जहाजों की संख्या करीब 3,200 व्यापारिक जहाज
फंसे हुए नाविक (Seafarers) लगभग 20,000 लोग
कच्चे तेल की सप्लाई जापान जैसे देशों ने रिजर्व स्टॉक निकालना शुरू किया

ब्रिटेन और अमेरिका मिलकर इस समुद्री रास्ते को फिर से सुरक्षित रूप से खोलने के लिए सैन्य योजना तैयार कर रहे हैं ताकि व्यापार दोबारा शुरू हो सके। International Maritime Organization (IMO) ने भी इन हमलों की निंदा की है और जहाजों को निकालने के लिए एक सुरक्षित ढांचा तैयार करने की अपील की है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com