इज़राइली हमले में यमन की राजधानी सना में स्थित अख़बार 26 सितंबर के दफ़्तर पर बमबारी की गई थी। इस हमले में 31 पत्रकार समेत मीडिया से जुड़े लोग मारे गए जबकि 22 लोग घायल हुए। मारे गए लोगों में एक बच्चा भी शामिल था, जो एक पत्रकार के साथ वहां आया था। बता दें कि यह हमला 10 सितंबर को सना में हुआ था।

अख़बार के संपादक नासिर अल ख़दरी ने बताया कि यह घटना पत्रकारों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला है। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) के मुताबिक 2009 के बाद यह सबसे घातक हमला है, जब फिलीपींस में 32 पत्रकारों की हत्या हुई थी।

यह अख़बार यमनी सेना का आधिकारिक प्रकाशन है, जिस पर इस समय हूती विद्रोहियों का नियंत्रण है। यमनी पत्रकार संघ ने कहा कि भले ही अख़बार हूती नियंत्रित हो, लेकिन मारे गए कई पत्रकार साधारण नागरिक थे और किसी सैन्य गतिविधि से जुड़े नहीं थे।

इज़राइली सेना (IDF) का कहना है कि उसने हूती आतंकियों के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें उनका जनसंपर्क विभाग भी शामिल था, जिसे वे “प्रचार फैलाने” का जिम्मेदार मानते हैं। IDF ने दावा किया कि मीडिया को निशाना बनाने का उनका इरादा नहीं था, लेकिन हवाई हमले के दौरान यह दफ़्तर भी प्रभावित हुआ। पत्रकार संगठनों ने इस हमले को “निर्दयी और अनुचित” बताते हुए कड़ी निंदा की है।