वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा कदम, 41 देशों ने मिसाइल और स्पेस लॉन्च से 24 घंटे पहले सूचना देने की मांग की

दुनियाभर में बढ़ रहे तनाव और सुरक्षा को लेकर चिंता के बीच अब कई देशों ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है। 41 देशों के एक समूह ने परमाणु हथियार संपन्न देशों से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और स्पेस लॉन्च से कम-से-कम 24 घंटे पहले सूचना देने की सख्त मांग की है। जिनेवा में आयोजित निरस्त्रीकरण सम्मेलन के दौरान यह संयुक्त बयान जारी किया गया, जिसमें चेतावनी दी गई है कि बिना किसी पूर्व सूचना के किए जाने वाले मिसाइल परीक्षण क्षेत्रीय शांति और वैश्विक सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकते हैं।
पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने पर जोर
तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अहम बयान मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अमेरिकी मिशन की ओर से जारी किया गया। इस बयान में हस्ताक्षर करने वाले देशों ने बैलिस्टिक मिसाइल प्रसार के खिलाफ हेग आचार संहिता यानी HCOC सहित पारदर्शिता और आपसी विश्वास बढ़ाने वाले सभी जरूरी उपायों का सख्ती से पालन करने की अपील की है। देशों का कहना है कि पर्याप्त पूर्व सूचना और जरूरी विवरण दिए बिना परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इससे परीक्षण स्थल के आसपास के इलाकों में रहने वाले देशों की शांति और सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित होती है।
प्रशांत क्षेत्र में बिना सूचना के हुए परीक्षणों का हवाला
बैठक में मौजूद समूह ने प्रशांत क्षेत्र में हाल ही में सामने आए बिना पूर्व सूचना वाले मिसाइल परीक्षणों का विशेष रूप से हवाला दिया। उन्होंने कहा कि टकराव से बचने के लिए जो तय तरीके बनाए गए हैं, अगर उनका पालन नहीं किया जाता है तो इससे गलतफहमी पैदा होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और पूरी दुनिया की स्थिरता कमजोर होती है। यह संयुक्त बयान ऐसे समय में सामने आया है जब चीन ने 6 जुलाई को प्रशांत महासागर के खुले पानी में अचानक एक SLBM यानी पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसकी अमेरिका और कई अन्य देशों ने कड़ी आलोचना की थी। सितंबर 2024 में प्रशांत महासागर में एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM के परीक्षण के बाद चीन का यह दूसरा ऐसा रणनीतिक परीक्षण था। सितंबर 2024 का वह परीक्षण साल 1980 के बाद से चीन का इस तरह का पहला परीक्षण माना गया था।
किन बातों की जानकारी देना है जरूरी
इन 41 देशों ने खासतौर पर परमाणु हथियार संपन्न देशों से यह आग्रह किया है कि वे ICBM, SLBM और स्पेस लॉन्च व्हीकल यानी SLV के प्रक्षेपण से कम से कम 24 घंटे पहले पूरी जानकारी साझा करें। समूह के मुताबिक, इस पूर्व सूचना में मिसाइल या लॉन्च व्हीकल का प्रकार, लॉन्च होने की संभावित समय सीमा, लॉन्च करने का क्षेत्र, अनुमानित उड़ान पथ और समुद्र में सफर करने वाले नाविकों व विमान चालकों के लिए स्पष्ट सुरक्षा चेतावनी शामिल होनी चाहिए। समूह ने साफ तौर पर कहा कि इस तरह की नियमित और पारदर्शी सूचना व्यवस्था से किसी भी देश की सैन्य क्षमताओं या उसकी जरूरी जरूरतों पर कोई रोक नहीं लगती है, बल्कि इससे किसी भी तरह की गलतफहमी का जोखिम कम होता है, आपसी विश्वास मजबूत होता है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता बढ़ती है।
किन देशों ने किया है समर्थन और चीन की प्रतिक्रिया
इस महत्वपूर्ण बयान पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में अमेरिका, अल्बानिया, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, चेकिया, डेनमार्क, एस्टोनिया, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आइसलैंड, इटली, जापान, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, मार्शल आइलैंड्स, मोंटेनेग्रो, नीदरलैंड, न्यूज़ीलैंड, नॉर्थ मैसेडोनिया, नॉर्वे, पलाऊ, फ़िलीपींस, पोलैंड, पुर्तगाल, दक्षिण कोरिया, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, तुर्की, यूक्रेन और यूके शामिल हैं। दूसरी तरफ, निशस्त्रीकरण मामलों के लिए चीन के राजदूत ली चिजियांग ने इस संयुक्त बयान को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन के वैध और उचित रक्षा आधुनिकीकरण पर किसी तरह का सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए और मिसाइल लॉन्च की अग्रिम सूचना देने में बीजिंग की सद्भावना का भू-राजनीतिक हिसाब-किताब के लिए दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।