दुबई में कमाने गए 7 भारतीय नागरिकों के फंसने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. ये लोग पिछले कई दिनों से वहां गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं और उन्हें पिछले तीन महीनों से कोई वेतन भी नहीं मिला है. इन नागरिकों ने अब सोशल मीडिया के माध्यम से भारत सरकार से तत्काल वतन वापसी और मदद की अपील की है.

दुबई में फंसे भारतीय नागरिकों की क्या है स्थिति?

ये सभी 7 भारतीय नागरिक संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में बेहतर कमाई की उम्मीद में गए थे. लेकिन जिस कंपनी में उन्हें काम पर रखा गया था, उसने तीन महीने से कोई सैलरी नहीं दी है. इसके साथ ही उनकी आईडी भी रद्द कर दी गई है, जिसके कारण वे कानूनी रूप से न तो कहीं दूसरा काम कर सकते हैं और न ही किसी अस्पताल में चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकते हैं. वर्तमान में इनके पास खाने, पीने के पानी और जरूरी दवाओं तक के लिए पैसे नहीं बचे हैं.

एजेंट ने नौकरी के नाम पर की लाखों रुपये की धोखाधड़ी

इस पूरे मामले में पप्पू नाम के एक एजेंट की भूमिका सामने आई है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि इस एजेंट ने सैंपल पैकिंग के काम का झांसा देकर एक परिवार से करीब 5,85,000 रुपये लिए थे. लेकिन जब यह व्यक्ति दुबई पहुंचा तो उसे दूसरा ही काम थमा दिया गया. अब ये सभी लोग वहां फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं और उनके पास वापस लौटने का भी कोई जरिया नहीं बचा है.

पीड़ितों ने भारत सरकार से लगाई मदद की गुहार

अपनी आईडी रद्द होने और गंभीर आर्थिक तंगी से परेशान होकर इन भारतीयों ने भारत सरकार और भारतीय दूतावास से मदद मांगी है. उन्होंने गुहार लगाई है कि उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाने की व्यवस्था की जाए ताकि वे सुरक्षित अपने घर लौट सकें. इस तरह की घटनाएं खाड़ी देशों में जाने वाले प्रवासियों के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं कि वे किसी भी एजेंट पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल अवश्य कर लें.

Frequently Asked Questions (FAQs)

दुबई में फंसे भारतीय नागरिकों की मुख्य समस्या क्या है?

इन नागरिकों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है, उनकी आईडी रद्द कर दी गई है जिससे वे चिकित्सा सहायता या अन्य काम नहीं कर सकते, और उनके पास खाने-पीने के लिए भी पैसे नहीं हैं.

एजेंट ने नौकरी दिलाने के नाम पर कितने पैसे लिए थे?

आरोप है कि पप्पू नाम के एक एजेंट ने सैंपल पैकिंग की नौकरी दिलाने के झांसे में एक पीड़ित के परिवार से करीब 5,85,000 रुपये की रकम ली थी.