केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दुबई में शिक्षक दिवस के अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के CBSE से जुड़े स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) की शुरुआत की। इसे विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के बीच नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह कार्यक्रम CBSE रीजनल ऑफिस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, दुबई द्वारा भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत “एक पेड़ मां के नाम” पहल के तहत ग़ाफ़ पेड़ लगाने से हुई, जो स्थिरता और विकास का प्रतीक है। इस अवसर पर CBSE सचिव हिमांशु गुप्ता और CBSE RO एवं COE निदेशक डॉ. राम शंकर ने बोर्ड की वैश्विक पहलों की जानकारी दी। भारतीय हाई स्कूल, दुबई के छात्रों ने ओडिशा की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। समारोह में UAE के 225 से अधिक प्रिंसिपल्स और स्कूल प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जबकि 21 देशों के स्कूल वर्चुअली जुड़े।
भारतीय राजदूत संजय सुदीर ने शिक्षकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे भारत की वैश्विक शिक्षा पहचान को मजबूत कर रहे हैं। CBSE सचिव गुप्ता ने भी विदेशों में CBSE स्कूलों को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण का स्तंभ बताया और संस्थानों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को अपनाने की अपील की। उन्होंने घोषणा की कि UAE के 10 स्कूल पहले ही ATL स्थापित करने का संकल्प ले चुके हैं। प्रधान ने कहा कि ये लैब्स बच्चों में क्रिएटिविटी, क्रिटिकल थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को बढ़ावा देंगी, ताकि वे टेक्नोलॉजी आधारित भविष्य के लिए तैयार हो सकें।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने विश्वभर से जुड़े स्कूल प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब दिए और शैक्षणिक सुधारों व सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। अंत में भारत के दुबई स्थित महावाणिज्य दूत सतीश कुमार सिवन ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और हाई टी का आयोजन हुआ।
विशेष सत्र में दीपाली उपाध्याय (प्रोग्राम डायरेक्टर, अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग) और अनिल कुमार (प्रिंसिपल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, आर.के. पुरम, नई दिल्ली) ने ATLs की भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि यह पहल NEP 2020 के अनुरूप छात्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करेगी। दुबई में हुआ यह शिक्षक दिवस समारोह CBSE के लिए ऐतिहासिक क्षण माना गया, जिसने इसे वैश्विक स्तर पर भारतीय शिक्षा और नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में मजबूत कदम साबित किया।





