राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक बड़ा और अहम फैसला लिया गया है। शहर में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में, इस साल के अंत तक दिल्ली के परिवहन बेड़े में करीब 2,000 नई इलेक्ट्रिक बसें जोड़ने की योजना बनाई गई है। इस कदम का सीधा मकसद न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मुहैया कराना है, बल्कि सड़कों पर निजी वाहनों की भीड़ को कम कर सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना भी है।
प्रदूषण के खिलाफ जंग: सार्वजनिक परिवहन को मजबूत कर निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने की तैयारी
दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुआं है। इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की नीति पर तेजी से काम किया जा रहा है। ये नई बसें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होंगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। प्रशासन का मानना है कि जब सार्वजनिक परिवहन सुगम और आधुनिक होगा, तो लोग अपनी निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम करेंगे, जिससे प्रदूषण और ट्रैफिक जाम दोनों समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर: बसों के संचालन के लिए राजधानी में तैयार होगा 7 हजार चार्जिंग स्टेशनों का विशाल नेटवर्क
सिर्फ बसें खरीदना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके सुचारू संचालन के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को व्यापक स्तर पर विकसित किया जा रहा है। योजना के मुताबिक, अगले एक साल के भीतर पूरी दिल्ली में करीब 7,000 इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस नेटवर्क का फायदा न केवल सरकारी बसों को मिलेगा, बल्कि आम लोग भी अपने इलेक्ट्रिक वाहनों को आसानी से चार्ज कर सकेंगे, जिससे ई-मोबिलिटी को और बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य का खाका: साल 2026 तक डीटीसी के बेड़े में शामिल होंगी दो हजार से अधिक अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसें
दिल्ली परिवहन निगम (DTC) अपनी सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम कर रहा है। वर्ष 2026 के अंत तक 2,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों को बेड़े में पूरी तरह शामिल कर लिया जाएगा। डीटीसी ने इसकी शुरुआत करते हुए 280 इलेक्ट्रिक बसों का ऑर्डर पहले ही दे दिया है। नई बसों की खेप आने के बाद इन्हें शहर के सबसे व्यस्त रूट्स पर प्राथमिकता के आधार पर चलाया जाएगा, ताकि पीक आवर्स में यात्रियों को राहत मिल सके।
आम जनता को राहत: भीड़ कम होने के साथ ही सफर होगा आरामदायक, जाम और प्रदूषण से भी मिलेगी मुक्ति
इन नई बसों के सड़क पर उतरने से आम आदमी को सीधा फायदा पहुंचेगा। बसों की संख्या बढ़ने से ‘फ्रीक्वेंसी’ बेहतर होगी, यानी यात्रियों को बस के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे बसों के अंदर होने वाली भीड़भाड़ कम होगी और यात्रा अधिक आरामदायक बन सकेगी। इसके अलावा, सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य राजधानी को ‘ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल’ के रूप में विकसित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा मिल सके।





