Wing of Zion को बाहर भेजने की पृष्ठभूमि
2025 में ईरान पर इज़राइल के हमलों के बाद संभावित ईरानी जवाबी कार्रवाई के डर से नेतन्याहू का आधिकारिक विमान Ben-Gurion एयरपोर्ट से उड़ान भरकर एथेंस (ग्रीस) भेजा गया था।
जेरूसलम पोस्ट और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम इस आशंका में उठाया गया कि ईरानी मिसाइल या ड्रोन इज़राइल के एयरबेस और अहम एसेट्स को निशाना बना सकते हैं, इसलिए प्रधानमंत्री के विमान को पहले ही सुरक्षित लोकेशन पर शिफ्ट कर दिया गया।
शेलिंग/हमले से बचाने की रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि विमान को एथेंस जैसे स्थान पर तैनात करना एक “प्रिवेंटिव सेफ्टी मेजर” है, ताकि अगर इज़राइल के एयरफ़ील्ड या सैन्य ढांचे पर मिसाइल/ड्रोन हमला हो, तो पीएम का विमान सीधे निशाने पर न हो।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि नेतन्याहू या उनके परिवार के किसी सदस्य को संभावित हमले की स्थिति में जल्दी सुरक्षित बाहर निकालने की क्षमता बनाए रखने के लिए भी यह कदम उठाया गया होगा, भले ही आधिकारिक तौर पर लोकेशन या मकसद स्पष्ट न किया गया हो।
ईरान–इज़राइल तनाव का सन्दर्भ
2024 और 2025 में ईरान द्वारा इज़राइल पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले तथा उसके जवाब में इज़राइली ऑपरेशन (जैसे ईरानी न्यूक्लियर सुविधाओं पर कथित हमले) के दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की आशंका लगातार बनी रही।
ऐसे समय में इज़राइल ने न सिर्फ पीएम के विमान बल्कि कई इज़राइली एयरलाइंस के प्लेनों को भी विदेश के एयरपोर्ट्स (जैसे साइप्रस के लारनाका और ग्रीस) में पार्क करना शुरू किया, ताकि बड़े हमले की स्थिति में एयर एसेट्स सुरक्षित रहें।
आधिकारिक बयान और मीडिया रिपोर्ट
इज़राइली सेना (IDF) और पीएमओ ने आम तौर पर विमान की मूवमेंट पर खुलकर डिटेल नहीं दी, लेकिन मीडिया लीक और फ्लाइट‑ट्रैकिंग डेटा से पता चला कि Wing of Zion एथेंस की तरफ गया और इज़राइल के ऊपर संभावित ईरानी हमले से पहले ही देश से बाहर था।
तुर्की की TRT और अन्य आउटलेट्स ने लिखा कि एथेंस में विमान की मौजूदगी सुरक्षा प्रोटोकॉल, संभावित डिप्लोमैटिक कंसल्टेशन और ईरानी बदले से बचाव—तीनों कारणों के मिश्रण के रूप में देखी जा रही है।
आज के दावे को कैसे देखा जाए
“आज नेतन्याहू का विमान शेलिंग से बचाने के लिए देश से बाहर ट्रांसफर किया गया” जैसे दावों की शैली पहले दर्ज हो चुकी घटनाओं से मेल खाती है, जहां बढ़ते तनाव के बीच विमान को पहले ही सुरक्षित देश में भेज दिया गया था।
फिलहाल खुली रिपोर्टों में 2025 की उड़ान (एथेंस ट्रांसफर) और 2024 के ईरानी हमले के दौरान Nevatim एयरबेस से विमान हटाने का स्पष्ट ज़िक्र मिलता है, जो यह दिखाता है कि सुरक्षा जोखिम बढ़ते ही इज़राइल नेतृत्व विमान को देश से बाहर रखने की रणनीति अपनाता रहा है




