ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने हाल ही में बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपने काम को लेकर कुछ हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले आठ सालों (2018-2026) में उनके हाथ से कई बड़े प्रोजेक्ट्स निकल गए। रहमान का कहना है कि उन्होंने कभी सीधे तौर पर भेदभाव महसूस नहीं किया, लेकिन उन्हें ऐसा लगता है कि इंडस्ट्री में ‘पॉवर डायनामिक्स’ यानी ताकत का संतुलन बदल गया है। अब फैसले उन लोगों के हाथ में हैं जो रचनात्मक (क्रिएटिव) नहीं हैं।
बॉलीवुड में काम कम मिलने की असली वजह
एआर रहमान ने बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें अक्सर ‘चाइनीज विस्पर्स’ (अफवाहों या दबी जुबान में कही गई बातों) के जरिए पता चलता है कि कोई प्रोजेक्ट उन्हें मिलने वाला था, लेकिन बाद में म्यूजिक कंपनियों ने उसे 5 अलग-अलग कंपोजर्स में बांट दिया। रहमान ने कहा, “मुझे पता चलता है कि उन्होंने मुझे बुक किया था, लेकिन फिर म्यूजिक कंपनी ने अपनी मर्जी चलाई। मैं कहता हूं, ठीक है, अच्छा है। मुझे अपने परिवार के साथ बिताने के लिए और वक्त मिल गया।” उन्होंने साफ किया कि वे काम मांगने के लिए किसी के पास नहीं जाते और न ही जाना चाहते हैं। उनका मानना है कि काम उनकी ईमानदारी और काबिलियत के आधार पर खुद उनके पास आना चाहिए।
भाषा बनी थी सबसे बड़ी बाधा
रहमान ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि ‘रोजा’, ‘बॉम्बे’ और ‘दिल से’ जैसी सुपरहिट फिल्में देने के बावजूद वे खुद को बॉलीवुड में एक बाहरी व्यक्ति (आउटसाइडर) महसूस करते थे। इसका सबसे बड़ा कारण हिंदी भाषा न आना था। तमिल बैकग्राउंड से होने के कारण उन्हें हिंदी अपनाने में भावनात्मक संघर्ष करना पड़ा। फिल्म निर्माता सुभाष घई ने उन्हें सलाह दी थी कि अगर वे लंबे समय तक इंडस्ट्री में टिकना चाहते हैं, तो उन्हें हिंदी सीखनी ही होगी। इस सलाह को मानते हुए रहमान ने न सिर्फ हिंदी सीखी, बल्कि उर्दू भी पढ़ी, क्योंकि पुराने हिंदी गानों की नींव उर्दू पर ही टिकी थी।
सुखविंदर सिंह और पंजाब का कनेक्शन
भाषा सीखने की जिज्ञासा रहमान को पंजाबी संगीत तक ले गई। उन्होंने बताया कि वे एक ऐसे सिंगर की तलाश में थे जो पंजाबी में गा भी सके और लिख भी सके। एक दोस्त की सिफारिश पर उनकी मुलाकात सुखविंदर सिंह से हुई। इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास है। दोनों की जोड़ी ने ‘छैया छैया’, ‘रमता जोगी’ और ऑस्कर जीतने वाले ‘जय हो’ जैसे यादगार गाने दिए। रहमान का मानना है कि फिल्म ‘ताल’ के बाद ही उनका संगीत उत्तर भारत के हर घर तक पहुंचा, क्योंकि उसमें पंजाबी रिदम और पहाड़ी लोक संगीत का बेहतरीन मिश्रण था।
करियर के अहम पड़ाव और विवाद
एआर रहमान के करियर में आए बदलावों और हालिया घटनाओं को नीचे दी गई तालिका में संक्षेप में समझा जा सकता है:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| टर्निंग पॉइंट | फिल्म ‘ताल’ (1999) से उत्तर भारत में पहचान मिली। |
| सीखी गई भाषाएं | हिंदी, उर्दू, अरबी और पंजाबी। |
| काम का नजरिया | काम के पीछे भागने के बजाय परिवार के साथ समय बिताना पसंद। |
| आगामी प्रोजेक्ट | रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर फिल्म ‘रामायण’। |
| हालिया विवाद | कोरियोग्राफर जानी मास्टर (POCSO आरोपी) के साथ काम करने पर आलोचना। |
रामायण और जानी मास्टर विवाद
फिलहाल एआर रहमान नितेश तिवारी की भव्य फिल्म ‘रामायण’ का संगीत तैयार करने में व्यस्त हैं, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रहे हैं। हालांकि, नवंबर 2025 में रहमान को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना भी करना पड़ा था। उन्होंने राम चरण की फिल्म के एक गाने के लिए कोरियोग्राफर जानी मास्टर के साथ काम किया, जिन पर 2024 में यौन उत्पीड़न (POCSO एक्ट) के तहत आरोप लगे थे। लोगों ने इस पर सवाल उठाए, क्योंकि रहमान ने पहले #MeToo के आरोपी गीतकार वैरामुथु के साथ काम करने से मना कर दिया था। इन विवादों के बावजूद, रहमान अपने संगीत और काम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
Last Updated: 16 January 2026





