भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश की राह को और आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सेबी ने ‘SWAGAT-FI’ फ्रेमवर्क पेश किया है, जो एक एकीकृत पंजीकरण प्रणाली है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेशकों के लिए अनुपालन (compliance) और ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के भारतीय बाजार में प्रवेश कर सकें।
एक ही आवेदन से एफपीआई और एफवीसीआई रजिस्ट्रेशन
SWAGAT-FI फ्रेमवर्क की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब पात्र विदेशी निवेशकों को अलग-अलग रजिस्ट्रेशन के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। इस नई प्रणाली के तहत, निवेशक एक ही आवेदन के माध्यम से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) और विदेशी उद्यम पूंजी निवेशक (FVCI) दोनों का दर्जा प्राप्त करने के लिए पंजीकरण कर सकते हैं। इससे अलग-अलग फॉर्म भरने और दस्तावेजों को जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। साथ ही, यह निवेशकों को एक एकीकृत निवेश और लेखांकन अनुभव के माध्यम से विभिन्न क्षमताओं के तहत अपनी प्रतिभूतियों (securities) का प्रबंधन करने की भी अनुमति देता है।
रजिस्ट्रेशन की वैधता अब 10 साल
विदेशी निवेशकों को राहत देते हुए सेबी ने रजिस्ट्रेशन की वैधता अवधि को बढ़ा दिया है। इस नए फ्रेमवर्क के तहत रजिस्ट्रेशन अब 10 साल के लिए वैध होगा। इसका मतलब है कि निवेशकों को बार-बार रिन्यूअल की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। इसके अलावा, पंजीकरण शुल्क का भुगतान भी अब प्रति दशक (हर 10 साल में) केवल एक बार करना होगा। यह कदम विदेशी निवेशकों के लिए लागत और समय दोनों की बचत करेगा।
कौन से विदेशी निवेशक होंगे पात्र?
यह फ्रेमवर्क विशेष रूप से कम जोखिम वाले और “विश्वसनीय” विदेशी निवेशकों को लक्षित करता है, जिनके पास अपने घरेलू न्यायालयों में मजबूत नियामक निगरानी है। मौजूदा एफपीआई (FPI) जो पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, वे भी अपने नामित डिपॉजिटरी भागीदार (DDP) को आवेदन करके SWAGAT-FI स्थिति में परिवर्तित हो सकते हैं। इसके अलावा, SWAGAT-FI एफपीआई के लिए कुछ योगदान-संबंधी प्रतिबंधों को हटा दिया गया है, विशेष रूप से लिबरलिज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के माध्यम से किए गए निवासी भारतीय योगदान के संबंध में।
प्रमुख लाभार्थियों की सूची
सेबी ने स्पष्ट किया है कि इस फ्रेमवर्क का लाभ उठाने वाले प्राथमिक लाभार्थियों में सरकारी और वित्तीय संस्थान शामिल होंगे। नीचे दी गई तालिका में उन मुख्य श्रेणियों को दर्शाया गया है जो इस योजना का लाभ उठा सकती हैं:
| निवेशक श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| केंद्रीय बैंक | विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंक |
| संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Funds) | सरकार के स्वामित्व वाले निवेश फंड |
| म्यूचुअल फंड | उचित रूप से विनियमित और ब्रॉड-बेस्ड फंड |
| बीमा और पेंशन फंड | अंतर्राष्ट्रीय बीमा कंपनियां और पेंशन योजनाएं |
नियम लागू होने की तारीख
सेबी ने इस संबंध में 16 जनवरी 2026 को सर्कुलर जारी किया है। बाजार सहभागियों को नई प्रणाली के अनुकूल होने के लिए पर्याप्त समय देते हुए, इस फ्रेमवर्क के प्रावधान 1 जून 2026 से प्रभावी होंगे। यह समय सीमा कस्टोडियन और अन्य मध्यस्थों को अपनी प्रणालियों को SWAGAT-FI की आवश्यकताओं के अनुसार अपडेट करने का अवसर प्रदान करेगी।
Last Updated: 17 January 2026




