दुबई की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए तीन अरब नागरिकों को छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। इन लोगों ने एक विवाहित जोड़े को विला खरीदने के लिए फाइनेंसिंग का झांसा देकर लाखों दिरहम की ठगी की थी। अदालत ने न केवल उन्हें जेल भेजा है, बल्कि उनसे ठगी गई रकम और मुआवजे के तौर पर कुल 9,00,000 दिरहम (लगभग 2 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का भी आदेश दिया है।
सोशल मीडिया के जरिए बुना जाल
इस पूरी ठगी की शुरुआत सोशल मीडिया पर देखे गए एक विज्ञापन से हुई थी। पीड़ित महिला ने इंटरनेट पर मॉर्गेज-फंडिंग (लोन सहायता) सेवाओं का प्रचार करने वाला एक विज्ञापन देखा। इसके बाद, एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और खुद को कंपनी का सेल्स मैनेजर बताया। आरोपियों ने दावा किया कि वे एक मशहूर प्रॉपर्टी डेवलपर के प्रतिनिधि हैं और उन्होंने मदद के लिए एक फर्जी फाइनेंसिंग कंपनी बना रखी थी।
फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
दंपती का भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने कई बार उनसे मुलाकात की। इस दौरान जालसाजों ने उन्हें पूरी तरह से फर्जी दस्तावेज दिखाए। इन दस्तावेजों में एक कमर्शियल लाइसेंस, एक बड़े डेवलपर के नाम पर प्रॉपर्टी-सेल का कॉन्ट्रैक्ट (बिक्री समझौता) और एक सरकारी विभाग के साथ किया गया कथित एग्रीमेंट शामिल था। ये कागज इतने असली लग रहे थे कि पीड़ित दंपती आसानी से उनके झांसे में आ गया।
8 लाख दिरहम लेकर हुए फरार
दस्तावेजों और बातों पर विश्वास करते हुए, दंपती विला खरीदने के लिए तैयार हो गया। उन्होंने सौदे को पक्का करने के लिए आरोपियों को 8,00,000 दिरहम (Dh800,000) का अग्रिम भुगतान (अपफ्रंट पेमेंट) कर दिया। जैसे ही पैसा ट्रांसफर हुआ, तीनों आरोपी गायब हो गए और उन्होंने संपर्क तोड़ दिया। ठगी का अहसास होने पर पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत ने सुनाई जेल और डिपोर्टेशन की सजा
जांच में यह साबित हो गया कि आरोपियों ने धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। आपराधिक मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि सजा पूरी होने के बाद तीनों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से डिपोर्ट (देश से बाहर) कर दिया जाएगा और फर्जी दस्तावेजों को जब्त कर लिया जाएगा।
पीड़ित को मिलेगा पूरा पैसा और मुआवजा
इस मामले से जुड़े सिविल केस (दीवानी मामले) में अदालत ने पीड़ितों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने माना कि इस धोखाधड़ी से दंपती को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि मानसिक तनाव और वित्तीय अस्थिरता का भी सामना करना पड़ा है। इसलिए, कोर्ट ने आरोपियों को ठगी गई रकम के साथ-साथ अतिरिक्त मुआवजा देने का भी आदेश दिया।
| विवरण (Details) | राशि (Amount) |
|---|---|
| वापस की जाने वाली मूल राशि | 8,00,000 दिरहम |
| मानसिक और आर्थिक नुकसान का मुआवजा | 1,00,000 दिरहम |
| कुल भुगतान जो आरोपियों को करना है | 9,00,000 दिरहम |
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जब तक पूरा भुगतान नहीं हो जाता, तब तक दावे की तारीख से 5 प्रतिशत कानूनी ब्याज भी देना होगा।
Last Updated: 18 January 2026




