US Visa: भारतीयों को 221(g) रिफ्यूजल और सोशल मीडिया जांच से हो रही परेशानी
भारतीयों को US वीजा आवेदन में आजकल पहले से कहीं ज़्यादा दिक्कतें आ रही हैं। खासकर अस्थायी 221(g) नोटिस मिलने की संख्या बहुत बढ़ गई है। जनवरी 2025 से लागू हुई सोशल मीडिया की अनिवार्य जांच और सख्त बैकग्राउंड चेक की वजह से ऐसा हो रहा है। H-1B वीजा के मामले में भारतीय दुनियाभर में 70% से ज़्यादा वीजा पाते हैं, और अब वे इस सख्ती से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं।
आवेदकों को अक्सर ऐसे अतिरिक्त दस्तावेज देने पड़ रहे हैं जो पहले नहीं मांगे जाते थे। इनमें पुराने पुलिस रिकॉर्ड, टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट या दशकों पुराने सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट शामिल हैं। यह उन लोगों के साथ भी हो रहा है जिनके पास वैध दस्तावेज हैं या जिन्होंने पहले कई बार वीजा लिया है।
क्या है 221(g) रिफ्यूजल और क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
US इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के सेक्शन 221(g) का मतलब है कि आपके वीजा आवेदन को अस्थायी रूप से रोका गया है या होल्ड पर रखा गया है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि काउंसलर अधिकारी निर्णय लेने से पहले सभी जानकारी को वेरीफाई कर सकें और बैकग्राउंड चेक कर सकें।
वैसे तो H-1B या स्टूडेंट वीजा (F1) आवेदनों के लिए 221(g) नोटिस मिलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब ऐसे आवेदनों को भी होल्ड पर रखा जा रहा है जिनमें पहले 221(g) की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। Murthy Law Firm के वकील Joel Yanovich ने बताया कि 221(g) नोटिस की दर ज़्यादा दिख रही है। लोग अपॉइंटमेंट के बाद भी ज़्यादा देरी का सामना कर रहे हैं। मई 2025 से ट्रंप प्रशासन के तहत 221(g) रिफ्यूजल की दो नई कैटेगरी सामने आई हैं, जो पहले नहीं देखी गई थीं। इनमें दशक पुराने गिरफ्तारी रिकॉर्ड वाले आवेदकों को भी 221(g) मिल रहा है, जबकि उन्होंने पहले कई बार वीजा स्टैम्पिंग करवाई है।
Boundless Immigration के संस्थापक Xiao Wang ने बताया कि कई आवेदकों को ‘prudentially revoked’ यानी सावधानीपूर्वक रद्द किए जाने के ईमेल भी मिल रहे हैं, बिना किसी स्पष्टीकरण के। H-1B वीजा के लिए बायोमेट्रिक रिक्वेस्ट भी बढ़ी है, जो पहले नहीं थी।
सोशल मीडिया और पुराने रिकॉर्ड की जांच क्यों बनी समस्या?
जनवरी 2025 के बाद से सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच अनिवार्य कर दी गई है। यह नियम ज्यादातर नॉन-इमिग्रेंट वीजा पर लागू होता है, जैसे H-1B, स्टूडेंट (F1), L-1, और B-कैटेगरी वीजा। काउंसलर अधिकारी आवेदकों की सार्वजनिक सोशल मीडिया गतिविधि की जांच कर रहे हैं ताकि यह देख सकें कि कोई असंगति तो नहीं है।
Gnanamookan Senthurjothi, जो Visa Code के संस्थापक हैं, ने बताया कि पुराने रिकॉर्ड, जैसे एक दशक पुराने गिरफ्तारी रिकॉर्ड, अब 221(g) का कारण बन रहे हैं। यहां तक कि जिनके पास वैध दस्तावेज हैं, उनके वीजा रद्द किए जा रहे हैं और उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए 221(g) दिया जा रहा है। इस वजह से सैकड़ों भारतीय भारत में फंसे हुए हैं। आवेदकों को टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेज जमा करने के लिए कहा जा रहा है।
किन वीजा आवेदकों पर पड़ रहा है ज़्यादा असर?
भारतीय US वीजा के सबसे बड़े प्राप्तकर्ताओं में से एक हैं। FY24 में जारी किए गए कुल H-1B वीजा में से 70% से ज़्यादा भारतीयों को मिले थे। इसलिए सख्त सीमा नियंत्रण से वे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं।
- H-1B वीजा: जैसा कि बताया गया है, 70% से ज़्यादा H-1B वीजा धारक भारतीय हैं और वे इस नई सख्ती के सीधे निशाने पर हैं।
- स्टूडेंट वीजा (F1): 2024 में स्टूडेंट वीजा रिफ्यूजल दर 41% तक पहुंच गई थी, जो पिछले 10 सालों में सबसे ज़्यादा है। 2025-2026 में सोशल मीडिया की जांच (जो लगभग 18% रिफ्यूजल का कारण है), सेक्शन 214(b) के तहत इमिग्रेशन इरादे की जांच, और डिजिटल फुटप्रिंट से जुड़ी समस्याओं जैसे करियर में विरोधाभास या US-विरोधी पोस्ट के कारण यह दर और बढ़ गई है। सीटों की सीमित संख्या और जॉब मार्केट में दिक्कतों के कारण नामांकन में लगभग 75% की गिरावट आई है।
वीजा प्रक्रिया में कितनी देरी हो रही है?
वीजा आवेदनों के मूल्यांकन में अब ज़्यादा समय लग रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी हो गई है। Xiao Wang ने बताया कि दिसंबर 2025 की शुरुआत में अपॉइंटमेंट बड़े पैमाने पर रद्द किए गए थे। इन अपॉइंटमेंट को पहले मार्च और अप्रैल के लिए रीशेड्यूल किया गया था, लेकिन फिर कुछ को नवंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया।
यह देरी IT सेक्टर के लिए खास चिंता का विषय है, जो 280 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अब IT कंपनियों को अपने US डिप्लॉयमेंट के लिए 4-6 महीने का अतिरिक्त समय लेकर चलना चाहिए।
योगदान देने वाले कारक
| कारक | विवरण | स्त्रोत से उदाहरण |
|---|---|---|
| सोशल मीडिया की जांच | जनवरी/जून 2025 से अनिवार्य; सार्वजनिक प्रोफाइल में असंगतियों की जांच। | दशक पुराने ट्वीट, आलोचनात्मक पोस्ट जिससे वीजा रद्द/निर्वासन का जोखिम। |
| बैकग्राउंड चेक | गिरफ्तारी रिकॉर्ड पर गहरी जांच, H-1B के लिए बायोमेट्रिक्स। | टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड महीनों बाद मांगे गए। |
| व्यापक रुझान | ट्रंप-बाद की नीतियों में सख्ती; US चुनाव चक्र के दौरान जारी रहने की उम्मीद। | सामूहिक बायोमेट्रिक मांग, धीमी मूल्यांकन प्रक्रिया। |
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का सुझाव है कि आवेदकों को अपने सोशल मीडिया की पहले से जांच करनी चाहिए, गिरफ्तारी से संबंधित सभी दस्तावेज तैयार रखने चाहिए, प्लेटफॉर्म पर अपनी जानकारी को लगातार अपडेट करना चाहिए (जैसे भारत-केंद्रित सामग्री), और पुलिस प्रमाण पत्र/स्टेटस ट्रैकिंग के लिए उपकरणों का उपयोग करना चाहिए। फिलहाल इस नीति में कोई बदलाव की घोषणा नहीं की गई है, जिससे 221(g) ‘नया सामान्य’ बन गया है।
Last Updated: 22 January 2026




