भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अब भागलपुर से हावड़ा के बीच 105 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर ‘कवच’ प्रणाली लगा दी गई है. इस नई तकनीक से ट्रेनों का संचालन और भी सुरक्षित हो जाएगा, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा.
कवच प्रणाली से बढ़ी यात्रियों की सुरक्षा
भागलपुर और हावड़ा के बीच हर महीने 50 हजार से ज्यादा यात्री सफर करते हैं. इन सभी यात्रियों के लिए ट्रेन यात्रा अब पहले से अधिक सुरक्षित हो गई है. यह प्रणाली ड्राइवर को निर्धारित गति सीमा के भीतर ट्रेन चलाने में मदद करेगी. अगर ड्राइवर गति नियंत्रण में विफल रहता है, तो प्रणाली खुद-ब-खुद ब्रेक लगा देगी. इस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस सहित पांच ट्रेनें चलती हैं, जिन्हें सीधा लाभ मिलेगा.
रेलवे ने क्यों लगाया कवच
बालासोरो के पास हुए कोरोमंडल एक्सप्रेस हादसे के बाद पूर्व रेलवे ने सुरक्षा उपायों को तेजी से बढ़ा दिया. कवच प्रणाली को देश में ही डिजाइन, विकसित और तैयार किया गया है. यह उन रूट्स पर लगाई जा रही है जहां सुरक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत है. मथुरा-नागदा (549 मार्ग किमी) के बाद पूर्व रेलवे में यह 105 किमी का सबसे बड़ा इंस्टॉलेशन है.
धोनी-टेकाणी रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन तेज हुआ
धोनी और टेकाणी स्टेशन के बीच संझा घाट हाल्ट पर आईबीएच (इंटरमीडिएट ब्लॉक हट) प्रणाली शुरू कर दी गई. इससे एक ही लाइन पर दो ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन संभव होगा. आईबीएच के चालू होने से ट्रेनों की गति, लाइन क्षमता और समय प्रबंधन में सुधार होगा. अधिकारियों ने कमीशनिंग के बाद इसे शुरू करने की जानकारी दी.
कवच प्रणाली कैसे काम करती है
कवच एक जटिल ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है. इसमें लोको कवच, स्टेशन कवच, दूरसंचार टावर और ट्रैक पर लगे आरएफ-आईडी टैग जैसे कई घटक शामिल होते हैं. यह प्रणाली लगातार ट्रेन की गति पर नजर रखती है और किसी भी संभावित खतरे को पहचान कर उसे दूर करती है, जिससे दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलती है.




