नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों ने आज़ाद हिंद फ़ौज के गठन और संचालन में योगदान दिया था, जिसमें बिहार के भागलपुर जिले के कई सपूतों की भूमिका भी शामिल थी।
आज़ाद हिंद फ़ौज की नींव रखने वाले प्रमुख भारतीय
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फ़ौज का गठन कर अंग्रेजों को चुनौती दी थी। जापान में फ़ौज के गठन की तैयारी में पुरनी सराय, नाथनगर निवासी आनंद मोहन सहाय प्रमुख थे। वे नेताजी के राजनीतिक सलाहकार भी थे और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सशस्त्र क्रांति को दिशा दी थी।
गुप्त गतिविधियों का केंद्र ‘लाल गुलाब’
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र सिंह के अनुसार, ‘लाल गुलाब’ नाम का एक स्थान आज़ादी की गुप्त गतिविधियों का सशक्त केंद्र था। यहां से उठी क्रांति की चिंगारी ने कई युवाओं को आज़ाद हिंद फ़ौज की गोपनीय मुहिम से जोड़ा।
परिवारों और व्यक्तियों का अमूल्य योगदान
नाथनगर के पड़ौसी नरगा मोहल्ले के जहाजी भाई मीर मुर्तजा और मीर मुबारक का नाम भी इसी क्रम में सामने आता है। ब्रिटिश शासन के अधीन नौकरी में रहते हुए भी दोनों भाई गुप्त रूप से नेताजी के मिशन में सक्रिय थे। आनंद मोहन सहाय का पूरा परिवार देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत था। उनकी पत्नी सती सेन और पुत्री भारती चौधरी उर्फ आशा सहाय ने भी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी। आशा सहाय 15 साल की उम्र में नेताजी से मिलीं और 17 साल की उम्र में आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजिमेंट में शामिल हो गईं।




