दुबई पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स को कड़ी चेतावनी दी है। अधिकारियों ने कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई भी अपमानजनक या आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने पर यूएई के साइबर क्राइम कानून के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है। इसमें जेल और Dh500,000 तक का भारी जुर्माना शामिल है।
यूएई में कौन सा कानून साइबर अपराधों को नियंत्रित करता है?
यूएई में साइबर अपराधों, जिसमें सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट शामिल है, को नियंत्रित करने वाला मुख्य कानून संघीय डिक्री-कानून संख्या 34 ऑफ 2021 है। इसे अफवाहों और साइबर अपराधों का मुकाबला करने के लिए बनाया गया है और यह 2 जनवरी, 2022 से प्रभावी हुआ था। इस कानून को बाद में कानून संख्या 5 ऑफ 2024 द्वारा संशोधित किया गया है।
सोशल मीडिया पर किन गतिविधियों को अपराध माना जाता है?
यह कानून ऑनलाइन मानहानि, अपमान और गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने को अपराध मानता है। यह केवल मूल पोस्ट पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किए गए कमेंट, रिप्लाई और रिएक्शन्स पर भी लागू होता है। यूएई के अधिकारी इस पर सख्त निगरानी रखते हैं।
अपमानजनक पोस्ट पर क्या सजा हो सकती है?
ऑनलाइन अपमानजनक या आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने का दोषी पाए जाने पर व्यक्तियों को जेल और/या भारी जुर्माना का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से, यूएई साइबर क्राइम कानून के अनुच्छेद 43 के तहत ऑनलाइन अपमान और मानहानि के लिए जुर्माना Dh250,000 से Dh500,000 तक हो सकता है।
क्या ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यवहार के नियम अलग हैं?
नहीं, यूएई के अधिकारी इस बात पर जोर देते हैं कि ऑनलाइन व्यवहार भी उन्हीं कानूनी मानकों के अधीन है जो ऑफलाइन आचरण पर लागू होते हैं। इसका मतलब है कि डिजिटल बातचीत और सोशल मीडिया पर की गई गतिविधियां भी अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती हैं।



