इजरायल ने अमेरिका के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए नए सिरे से बातचीत की तैयारी शुरू कर दी है। Financial Times की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनका रक्षा मंत्रालय ट्रम्प प्रशासन के साथ एक नए 10-वर्षीय सुरक्षा समझौते (MOU) पर काम करना चाहते हैं। इसका मुख्य मकसद अमेरिकी सैन्य मदद को अगले दशक के लिए सुरक्षित करना है।
10 साल का नया समझौता कब से लागू होगा?
अमेरिका और इजरायल के बीच मौजूदा सुरक्षा समझौता वित्त वर्ष 2028 में खत्म हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नया प्रस्तावित समझौता 2029 से शुरू होकर अगले 10 सालों तक चलेगा। आमतौर पर ऐसे बड़े समझौतों को फाइनल करने में तीन साल का वक्त लगता है, लेकिन इजरायल इसे ट्रम्प के मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने से पहले ही पूरा करना चाहता है।
पैसों और मदद को लेकर क्या है मौजूदा स्थिति?
वर्तमान समझौते (2016 MOU) के तहत, अमेरिका इजरायल को हर साल 3.8 अरब डॉलर की सैन्य सहायता देता है। इसमें 3.3 अरब डॉलर विदेशी सैन्य वित्तपोषण (FMF) और 50 करोड़ डॉलर मिसाइल रक्षा के लिए होते हैं। 10 सालों में यह राशि कुल 38 अरब डॉलर बैठती है। नए समझौते में भी लंबी अवधि की प्लानिंग पर जोर दिया जाएगा।
क्या इजरायल अब मदद पर निर्भर नहीं रहेगा?
जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बयान दिया था कि इजरायल की अर्थव्यवस्था अगले एक दशक में 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। उनका लक्ष्य है कि धीरे-धीरे अमेरिकी कैश ग्रांट्स पर निर्भरता कम की जाए। हालांकि, इजरायली रक्षा प्रतिष्ठान एक मजबूत और गारंटीड सुरक्षा पैकेज चाहता है ताकि किसी भी भविष्य के खतरे से निपटा जा सके।
हाल ही में हुए बड़े घटनाक्रम क्या हैं?
| विषय | विवरण |
|---|---|
| हथियार बिक्री | ट्रम्प प्रशासन ने हाल ही में 8.4 अरब डॉलर के हथियारों की बिक्री को कांग्रेस को सूचित किया है। |
| बोर्ड ऑफ पीस | मिडिल ईस्ट में शांति और गाजा पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ लॉन्च किया है। |
| बंधक मिशन | नेतन्याहू ने गाजा से सभी बंधकों की वापसी के मिशन को ‘पूरा’ घोषित कर दिया है। |
समझौते के नियम और शर्तें क्या होंगी?
पुराने नियमों के तहत इजरायल को अमेरिकी मदद का कुछ हिस्सा अपने घरेलू रक्षा उद्योग (Off-Shore Procurement) पर खर्च करने की छूट थी, जिसे 2028 तक पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। नए समझौते में यह नियम लागू रहेगा कि अमेरिकी फंड का बड़ा हिस्सा अमेरिकी कंपनियों से हथियार खरीदने में ही इस्तेमाल हो।




