अमेरिका में चल रहे सिविल फ्रॉड केस को लेकर अडानी ग्रुप की तरफ से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अमेरिकी शेयर बाजार नियामक (SEC) द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस को स्वीकार करने के लिए सहमति दे दी है। शुक्रवार को कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, अब उनके अमेरिकी वकील यह नोटिस प्राप्त करेंगे। इससे पहले नोटिस भेजने को लेकर पिछले काफी समय से तकनीकी दिक्कतें आ रही थीं, जिसे अब सुलझा लिया गया है।
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कोर्ट में वकीलों के बीच क्या समझौता हुआ?
अमेरिकी कोर्ट में गौतम अडानी और सागर अडानी के वकीलों ने SEC के साथ एक औपचारिक समझौता किया है। इसके तहत अब SEC को भारत सरकार के जरिए या ईमेल से नोटिस भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अडानी के वकील ही अमेरिका में कानूनी दस्तावेज स्वीकार कर लेंगे।
इससे पहले SEC ने शिकायत की थी कि भारत में आरोपियों तक नोटिस पहुंचाना मुश्किल हो रहा था। इस समझौते के बाद अब जज को ईमेल के जरिए नोटिस भेजने की अनुमति देने पर फैसला नहीं सुनाना पड़ेगा। वकीलों ने साफ किया है कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे, लेकिन उन्होंने कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देने का अपना हक सुरक्षित रखा है।
जवाब देने के लिए अब कितना समय मिला?
इस नई सहमति के बाद अडानी पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट की तरफ से 90 दिनों का समय दिया गया है। पूरी प्रक्रिया कुछ इस तरह चलेगी:
- 90 दिन: जज के हस्ताक्षर के बाद अडानी पक्ष को जवाब देना होगा या केस खारिज करने की अर्जी लगानी होगी।
- 60 दिन: अडानी पक्ष के जवाब के बाद SEC को अपनी बात रखने के लिए इतना समय मिलेगा।
- 45 दिन: अंत में, बचाव पक्ष को अपनी अंतिम दलील पेश करने के लिए 45 दिन और मिलेंगे।
जनवरी के आखिरी हफ्ते में जब नोटिस को लेकर खबरें आई थीं, तो अडानी ग्रुप के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया था। हालांकि, कंपनी ने बाद में स्थिति साफ की कि यह मामला व्यक्तिगत निदेशकों के खिलाफ है, कंपनी के खिलाफ नहीं।




