Dubai में किरायेदार ने नहीं दिया रेंट तो क्या होगा? मकान मालिकों के लिए ये है कानूनी रास्ता
दुबई में रहने वाले किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए वहां के रेंटल कानून को समझना बहुत जरूरी है। कई बार ऐसा होता है कि किरायेदार समय पर किराया नहीं दे पाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मकान मालिक उन्हें तुरंत घर से बाहर निकाल दें। दुबई के Rental Disputes Centre (RDC) और कानूनों के मुताबिक, घर खाली कराने के लिए एक तय प्रक्रिया है जिसका पालन करना अनिवार्य है। मकान मालिक को कानूनी रास्ता अपनाना पड़ता है और वह अपनी मर्जी से कोई कदम नहीं उठा सकता।
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30 दिन का लीगल नोटिस भेजना है जरूरी
दुबई के कानून के अनुसार, अगर किरायेदार किराया नहीं चुकाता है, तो मकान मालिक को सबसे पहले उसे 30 दिन का नोटिस देना होता है। यह जानना बहुत जरूरी है कि यह नोटिस व्हाट्सएप, ईमेल या जुबानी तौर पर नहीं दिया जा सकता। कानूनी रूप से मान्य होने के लिए, इसे Notary Public या रजिस्टर्ड मेल के जरिए ही भेजना पड़ता है। अगर किरायेदार इन 30 दिनों के अंदर अपना बकाया पैसा चुका देता है, तो घर खाली करने का नोटिस रद्द हो जाता है और वह उसी प्रॉपर्टी में रहना जारी रख सकता है।
RDC में केस और मकान मालिक के अधिकार
अगर 30 दिन का समय बीत जाने के बाद भी पैसा नहीं मिलता है, तो मकान मालिक RDC में केस फाइल कर सकता है। केस फाइल करने के लिए आमतौर पर सालाना रेंट का 3.5% फीस लगती है। केवल RDC ही अंतिम फैसला सुना सकता है कि किरायेदार को घर खाली करना है या नहीं। कानून मकान मालिकों को खुद से ताला बदलने, बिजली-पानी काटने या किरायेदार का सामान बाहर फेंकने की अनुमति बिल्कुल नहीं देता है। रेंट न देने के मामले में 30 दिन का नियम लागू होता है, जबकि घर बेचने या निजी इस्तेमाल के लिए 12 महीने का नोटिस देना पड़ता है।




