Trump का बड़ा फैसला, Middle East की तरफ रवाना हुआ अमेरिका का सबसे बड़ा जंगी जहाज, Iran पर दबाव बढ़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शुक्रवार को Middle East यानी मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने क्षेत्र में एक और अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (विमानवाहक पोत) तैनात करने की घोषणा की है। यह कदम ईरान के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत से ठीक पहले उठाया गया है। अमेरिका का सबसे आधुनिक और विशाल जहाज ‘USS Gerald R. Ford’ अब Middle East की ओर बढ़ रहा है, जो पहले से मौजूद ‘USS Abraham Lincoln’ के साथ शामिल होगा।
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बातचीत से पहले दबाव बनाने की रणनीति?
राष्ट्रपति Trump ने साफ किया है कि यह तैनाती एक सुरक्षा उपाय है। उनके दूत Steve Witkoff और Jared Kushner मंगलवार, 17 फरवरी को जिनेवा में ईरानी प्रतिनिधियों से मिलने वाले हैं। Trump का कहना है कि अगर बातचीत से कोई हल नहीं निकलता है, तो अमेरिका को इस ताकत की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अगले एक महीने में कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के लिए स्थिति मुश्किल हो सकती है। इस नए जहाज को वहां पहुंचने में लगभग एक सप्ताह का समय लगेगा।
Gulf में तेल की कीमतों और सुरक्षा पर असर
इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल तेज हो गई है। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) के मुताबिक, कुवैती तेल की कीमत में 10 सेंट की बढ़ोतरी हुई है और यह 67.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर अहम है क्योंकि इसका असर पूरे रीजन की सुरक्षा और व्यापार पर पड़ सकता है।
तैनाती से जुड़ी खास बातें:
- जहाज का नाम: USS Gerald R. Ford (दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर)।
- सैनिकों की संख्या: इस जहाज पर करीब 4,200 नाविक और क्रू मेंबर मौजूद हैं।
- मौजूदा स्थिति: यह कैरेबियन सागर से चलकर अरब सागर में तैनात USS Abraham Lincoln के साथ मिलेगा।
- मकसद: समुद्री रास्तों की सुरक्षा और ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाना।
ओमान और कतर जैसे देश इस दौरान कूटनीतिक संदेश पहुंचाने में मदद कर रहे हैं, ताकि किसी भी तरह के बड़े टकराव को रोका जा सके और समुद्री रास्ते खुले रहें।




