Ramadan 2026: सऊदी और UAE में दिखा चांद, बुधवार से शुरू होगा पवित्र महीना, जानिए ईद कब होगी
Saudi Arabia के सुप्रीम कोर्ट और UAE की मून-साइटिंग कमेटी ने मंगलवार, 17 फरवरी की शाम को चांद दिखने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि पवित्र रमजान का महीना बुधवार, 18 फरवरी 2026 से शुरू होगा। मंगलवार की रात से ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू कर दी गई है। हालांकि, ओमान और कुछ अन्य देशों में चांद नहीं दिखा है, इसलिए वहां गुरुवार से रमजान शुरू होगा।
रमजान और ईद की तारीखों को लेकर क्या है अपडेट?
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रमजान का पहला रोज़ा बुधवार, 18 फरवरी को रखा जाएगा। खगोल विदों की गणना के अनुसार, इस साल ईद-उल-फितर शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को होने की संभावना है। यह तारीख आखिरी दिनों में चांद दिखने पर निर्भर करेगी।
मंगलवार को सूर्य ग्रहण के कारण कुछ जानकारों ने कहा था कि चांद देखना मुश्किल हो सकता है, लेकिन Saudi Arabia के कई हिस्सों और तबुक वेधशाला में गवाहों ने चांद देखने की पुष्टि की। इसके बाद ही आधिकारिक ऐलान किया गया।
नौकरी करने वालों और स्कूलों के लिए क्या हैं नियम?
UAE और Saudi Arabia में रमजान के दौरान काम के घंटों और अन्य नियमों में बदलाव किया गया है, ताकि लोगों को इबादत में आसानी हो सके:
- UAE प्राइवेट सेक्टर: सभी कर्मचारियों के काम के घंटों में रोजाना 2 घंटे की कटौती की गई है।
- Saudi Arabia: मुस्लिम कर्मचारियों के लिए काम का समय अधिकतम 6 घंटे प्रतिदिन या हफ्ते में 36 घंटे तय किया गया है।
- UAE स्कूल: सरकारी स्कूलों में हफ्ते में एक दिन डिस्टेंस लर्निंग (ऑनलाइन क्लास) होगी और दुबई में शुक्रवार को 11:30 बजे छुट्टी हो जाएगी।
- मस्जिद के नियम (KSA): इफ्तार के लिए नकद चंदा इकट्ठा करने पर रोक है। ईशा और फज्र की अजान और इकामा के बीच सिर्फ 15 मिनट का समय रहेगा।
उमराह का खर्चा और जरूरी जानकारी
रमजान के दौरान उमराह करने जाने वाले लोगों के लिए नई कीमतें सामने आई हैं। UAE से बस द्वारा उमराह पैकेज की शुरुआत 2,500 दिरहम (AED) से हो रही है, जिसमें वीजा और रहना शामिल है। अगर कोई हवाई जहाज से जाना चाहता है, तो उसका खर्चा लगभग 8,250 दिरहम से शुरू होगा।
इसके अलावा, आम लोगों को राहत देने के लिए खाड़ी देशों (GCC) के मंत्रालयों ने खाने-पीने की जरूरी चीजों के दामों में भारी कटौती का ऐलान किया है ताकि रमजान के दौरान किसी पर आर्थिक बोझ न पड़े।




