Auto Service Center Business Idea: मात्र 5.5 लाख में शुरू करें अपना बिजनेस, हर महीने होगी 1.5 लाख तक की कमाई
आजकल सड़कों पर गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। चाहे पेट्रोल गाड़ी हो या नई इलेक्ट्रिक कार, सबको समय पर सर्विसिंग की जरूरत पड़ती है। फरवरी 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, गाड़ियों की बिक्री में 18% की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में अगर आप कम निवेश में अपना काम शुरू करना चाहते हैं, तो मल्टी-ब्रांड ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर खोलना एक बेहतरीन विकल्प है। इस बिजनेस में मंदी का असर कम होता है क्योंकि गाड़ियां चलेंगी तो मेंटेनेंस की जरूरत हमेशा रहेगी।
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कितना लगेगा पैसा और कैसे मिलेगी मदद?
अगर आप खुद का इंडिपेंडेंट सर्विस सेंटर खोलना चाहते हैं, तो इसमें लगभग 5.5 लाख से 8 लाख रुपये का खर्चा आता है। इसमें दुकान का एडवांस, मशीनें और स्पेयर पार्ट्स का खर्चा शामिल है। वहीं, अगर आप किसी बड़ी कंपनी की फ्रेंचाइजी लेते हैं, तो खर्च 10 से 15 लाख तक जा सकता है। सरकार ने बजट 2026 में छोटे व्यापारियों के लिए SME ग्रोथ फंड बनाया है, जिससे आपको आर्थिक मदद मिल सकती है। साथ ही, मुद्रा लोन योजना के तहत मशीनरी और वर्कशॉप विस्तार के लिए 10 से 20 लाख तक का लोन भी आसानी से उपलब्ध है। खाड़ी देशों से लौटने वाले भारतीय भी अपनी जमा पूंजी से यह बिजनेस अपने शहर में शुरू कर सकते हैं।
| खर्च/मद (Item) | अनुमानित लागत (Cost) |
| वर्कशॉप डिपॉजिट | ₹1 – 1.5 लाख |
| टूल्स और मशीनरी | ₹2 – 2.5 लाख |
| स्पेयर पार्ट्स स्टॉक | ₹1 – 1.5 लाख |
| इंटीरियर और बोर्ड | ₹50,000 – 80,000 |
| वर्किंग कैपिटल | ₹1 – 1.5 लाख |
| कुल अनुमानित लागत | ₹5.5 – 7.8 लाख |
कमाई का गणित और नए नियम
इस बिजनेस में शुरुआत में सारे खर्चे निकालकर आप महीने के 50,000 से 80,000 रुपये आसानी से बचा सकते हैं। जैसे-जैसे आपके पास ग्राहक बढ़ते हैं और गाड़ियों की वारंटी खत्म होती है, यह कमाई 1.5 लाख से 3 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। ‘GST 2.0’ लागू होने के बाद अब कार के स्पेयर पार्ट्स और एक्सेसरीज पर टैक्स घटकर 18% हो गया है, जिससे आपका मुनाफा मार्जिन बेहतर हुआ है।
कमाई बढ़ाने के लिए आप ग्राहकों को ‘एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट’ (AMC) ऑफर कर सकते हैं। इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनियों के साथ टाइ-अप करके एक्सीडेंटल रिपेयर का काम भी लिया जा सकता है। ध्यान रहे कि 2026 के नए नियमों के मुताबिक अब वर्कशॉप में कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) और आधुनिक एआई टूल्स का होना जरूरी है, क्योंकि नई गाड़ियों में सेंसर और ABS सिस्टम की जांच के लिए एडवांस मशीनों की जरूरत पड़ती है।




