अंडमान में पवन हंस हेलीकॉप्टर की समुद्र में इमरजेंसी लैंडिंग, 7 लोगों की बाल-बाल बची जान
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पवन हंस (Pawan Hans) कंपनी का एक हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण समुद्र में गिर गया। राहत की बात यह रही कि इसमें सवार सभी 7 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। यह घटना मायाबंदर (Mayabunder) के पास हुई, जहां हेलीकॉप्टर को रनवे से कुछ ही दूरी पर पानी में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। प्रशासन ने सभी के सुरक्षित होने की पुष्टि की है।
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कब और कैसे हुआ यह हादसा?
यह घटना 24 फरवरी 2026 की सुबह करीब 9:30 बजे हुई। जानकारी के मुताबिक, हेलीकॉप्टर रनवे तक पहुँचने ही वाला था कि करीब 300 मीटर पहले उसमें कुछ तकनीकी दिक्कत आ गई। अधिकारियों ने इसे ‘शॉर्ट लैंडिंग’ बताया है। पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को समुद्र में उतारा। इस हेलीकॉप्टर में 5 यात्री और 2 पायलट सवार थे।
शुरुआती जांच में तकनीकी खराबी (Technical Snag) को ही इस दुर्घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है। नागरिक उड्डयन विभाग ने मामले की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि असल वजह सामने आ सके।
यात्रियों की सुरक्षा और बचाव कार्य
हादसे के तुरंत बाद मरीन पुलिस ने तेजी दिखाते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। सभी यात्रियों और दोनों पायलट, कैप्टन अनिल जानू और कैप्टन टीपीएस गुलिया को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया गया। यात्रियों में रजिता देवी, शिशु कमल चंद्र दास, शिप्रा साहा और नम्बी अम्मा शामिल थे।
सभी को मायाबंदर के डॉ. आरपी अस्पताल (Dr. RP Hospital) में निगरानी और उपचार के लिए ले जाया गया। अच्छी खबर यह है कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। अंडमान प्रशासन ने पुलिस और बचाव दल की तत्परता की सराहना की है।
किराया और हेलीकॉप्टर अपग्रेड की जानकारी
अंडमान में पवन हंस हेलीकॉप्टर सेवा लोगों के लिए एक लाइफलाइन की तरह है। यहाँ पोर्ट ब्लेयर, जिसे अब श्री विजया पुरम (Sri Vijaya Puram) कहा जाता है, से मायाबंदर जाने के लिए स्थानीय निवासियों को करीब 3,375 रुपये किराया देना होता है। वहीं, पर्यटकों के लिए यह किराया 10,000 से 11,000 रुपये तक हो सकता है।
फिलहाल यहाँ इस्तेमाल हो रहे ‘डॉफिन N3’ हेलीकॉप्टर करीब 20 साल पुरानी तकनीक पर चल रहे हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अब पूरे बेड़े को आधुनिक सिकोरस्की (Sikorsky) हेलीकॉप्टरों से बदलने की योजना को मंजूरी दी है, जिससे भविष्य में यात्रा और सुरक्षित हो सकेगी।




