सऊदी अरब ने यमन के लिए खोला खजाना, 1.3 अरब रियाल की मदद से अब मिल सकेगा वेतन
सऊदी अरब ने अपने पड़ोसी देश यमन की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए एक बड़ी मदद का ऐलान किया है। सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निर्देश पर, सऊदी अरब ने यमन के बजट को सपोर्ट करने के लिए 1.3 अरब रियाल (लगभग 347 मिलियन डॉलर) देने की घोषणा की है। यह फैसला 25 फरवरी 2026 को लिया गया है, जिसका सीधा असर यमन के सरकारी कामकाज और वहां के आम लोगों पर पड़ेगा।
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यह पैसा किन कामों में खर्च होगा?
सऊदी अरब द्वारा दी गई यह राशि यमन सरकार के ‘ऑपरेशनल खर्चों’ यानी रोजमर्रा के कामकाज को चलाने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस फंड का उपयोग सरकारी कर्मचारियों (Civil Servants) की सैलरी देने के लिए किया जाएगा। यमन में कई परिवारों का घर सरकारी वेतन पर ही चलता है और पैसे की कमी के कारण अक्सर वेतन मिलने में देरी होती रही है।
यह मदद यमन की ‘प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल’ (PLC) की मांग पर दी गई है। यह पैसा मिलिट्री खर्च के लिए नहीं, बल्कि जनता को दी जाने वाली सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों को जारी रखने के लिए है। इसका मतलब है कि स्कूल, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों का काम सुचारू रूप से चल सकेगा।
आम जनता और अर्थव्यवस्था को क्या फायदा होगा?
जब किसी देश के पास विदेशी मुद्रा की कमी होती है, तो वहां की करेंसी कमजोर होने लगती है और महंगाई बढ़ जाती है। सऊदी अरब के इस 1.3 अरब रियाल के निवेश से ‘यमेनी रियाल’ (YER) को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। जब करेंसी मजबूत रहती है, तो बाहर से आने वाला खाने-पीने का सामान और जरूरी चीजें सस्ती रहती हैं, जिससे आम आदमी को सीधा फायदा होता है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह मदद यमन सरकार के लिए एक ‘लाइफलाइन’ की तरह है। इससे पहले जनवरी 2026 में भी सऊदी अरब ने यमन में विकास कार्यों, जैसे कि बिजली घर और अस्पतालों के लिए करीब 500 मिलियन डॉलर का पैकेज दिया था। यह नई मदद यमन में स्थिरता बनाए रखने और लोगों की आर्थिक दिक्कतों को कम करने की दिशा में एक अहम कदम है।




