ओमान के विदेश मंत्री ने अमेरिका को दी चेतावनी, कहा- यह आपकी जंग नहीं, शांति वार्ता हुई फेल
खाड़ी देशों में 28 फरवरी 2026 को अचानक तनाव काफी बढ़ गया है। ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र अलबुसैदी ने अमेरिका और इजराइल की हालिया सैन्य कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि कूटनीतिक बातचीत सही दिशा में थी, लेकिन इस अचानक हुए हमले ने शांति की उम्मीदों को झटका दिया है। ओमान, जो अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मुख्य मध्यस्थ था, ने अब अमेरिका को सीधे तौर पर चेतावनी जारी की है।
क्या कहा ओमान के विदेश मंत्री ने?
ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक कड़े बयान में अपनी निराशा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मैं इस स्थिति से बहुत निराश हूँ। गंभीर बातचीत और समझौतों को फिर से कमजोर कर दिया गया है। उन्होंने अमेरिका से अपील करते हुए कहा कि इसमें और अधिक न उलझें, क्योंकि यह उनकी लड़ाई नहीं है। विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि कूटनीतिक रास्तों के बंद होने से पूरी दुनिया की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है और मासूम लोगों की जान बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
शांति समझौते के बेहद करीब थी बात
यह तनाव तब बढ़ा जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। हैरानी की बात यह है कि इससे कुछ ही घंटे पहले जेनेवा में हुई बातचीत में काफी प्रगति हुई थी। ओमान ने पुष्टि की थी कि दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ‘ज़ीरो स्टॉकपाइलिंग’ यानी यूरेनियम का भंडार न बढ़ाने पर सहमत हो गए थे। इसके तहत मौजूदा यूरेनियम को कम करने और अंतरराष्ट्रीय जांच (IAEA) की अनुमति देने पर भी बात बन गई थी। लेकिन अब सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की तरफ से भी जवाबी हमले देखे गए हैं, जिसमें कुवैत के सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने की खबरें हैं।
आम लोगों और प्रवासियों पर क्या असर?
इस अचानक बदले माहौल का असर आम लोगों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। साइप्रस ने विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अपना ‘ESTIA’ प्लान एक्टिवेट कर दिया है। खाड़ी में रहने वाले भारतीय और अन्य विदेशी नागरिकों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि कई जगहों पर ट्रैवल एडवाइजरी जारी की जा रही है। जानकारों का कहना है कि जहां कल तक शांति समझौता होने की उम्मीद थी, वहां अब युद्ध जैसे हालात बन गए हैं, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता पर बुरा असर पड़ सकता है।




