Kuwait New Law: कुवैत में खाने-पीने की चीजों के दाम फिक्स, अब पुरानी कीमत पर ही मिलेगा सामान
कुवैत में रहने वाले लोगों और वहां काम करने वाले प्रवासियों के लिए सरकार ने एक बड़ा राहत भरा फैसला लिया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री ओसामा बूदाई ने एक नया आधिकारिक आदेश जारी किया है जिसके तहत खाने-पीने की सभी वस्तुओं की अधिकतम कीमतें तय कर दी गई हैं। यह कदम बाजार में अचानक होने वाली महंगाई को रोकने और लोगों को आर्थिक बोझ से बचाने के लिए उठाया गया है।
कीमतों को लेकर क्या है सरकार का नया आदेश
कुवैत सरकार के इस नए फैसले के बाद अब पूरे देश में खाने-पीने का कोई भी सामान पुरानी कीमतों से महंगा नहीं बिकेगा। इस आदेश में साफ कहा गया है कि सभी खाद्य पदार्थों की अधिकतम कीमत वही होगी जो 28 फरवरी 2026 से पहले बाजार में प्रचलित थी। इसका मतलब है कि दुकानदार या व्यापारी अब मनमानी कीमत नहीं वसूल पाएंगे।
- लागू होने की तारीख: यह नया नियम 2 मार्च 2026 से पूरे कुवैत में प्रभावी हो गया है।
- सामान का दायरा: इसमें कुवैत में बिकने वाली सभी प्रकार की खाने-पीने की चीजें शामिल हैं।
- नियम का मकसद: रमजान से पहले बाजार को स्थिर करना और ग्राहकों को महंगी कीमतों से सुरक्षा देना इसका मुख्य उद्देश्य है।
आम जनता और प्रवासियों के लिए जरूरी जानकारी
कुवैत में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर काफी राहत वाली है क्योंकि इससे उनके मासिक बजट पर पड़ने वाला बोझ कम होगा। सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि वे सामान जमा न करें क्योंकि देश में खाने-पीने की चीजों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। मंत्रालय ने बाजार की निगरानी के लिए अपनी वेबसाइट पर एक विशेष सिस्टम भी शुरू किया है जहां लोग आधिकारिक रेट चेक कर सकते हैं।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई भी सुपरमार्केट या दुकानदार तय कीमतों से ज्यादा पैसे लेता है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने इसके लिए कुछ निर्देश जारी किए हैं जो इस प्रकार हैं।
- फील्ड इंस्पेक्टरों की टीमें लगातार बाजारों और कोऑपरेटिव सोसायटियों का दौरा कर जांच करेंगी।
- उपभोक्ता किसी भी उल्लंघन की रिपोर्ट Sahel ऐप के माध्यम से सीधे मंत्रालय को दे सकते हैं।
- फसल अल-अंसारी ने पुष्टि की है कि नियम तोड़ने वाले वेंडरों पर तत्काल जुर्माना और कानूनी केस दर्ज किया जाएगा।
- देश की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए यह एक जरूरी सुधारात्मक कदम माना जा रहा है।




