ईरान के परमाणु केंद्र पर हमला, कुवैत में मिसाइलें गिराई गईं और तेल की कीमतों में भारी उछाल
ईरान ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि रविवार 1 मार्च 2026 को इस्फ़हान प्रांत में स्थित नतांज परमाणु केंद्र पर दो बड़े हमले हुए हैं। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी और IAEA में ईरान के राजदूत रजा नजाफी ने जानकारी दी कि इन हमलों के लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार हैं। इस घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और कुवैत जैसे पड़ोसी देशों में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।
कुवैत और प्रवासियों पर क्या असर पड़ा है?
कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी कुना के अनुसार कुवैती वायु सेना ने अपने हवाई क्षेत्र में कई संदिग्ध ड्रोनों और मिसाइलों को मार गिराया है। इस कार्रवाई के दौरान कुवैत की रक्षा प्रणालियों ने गलती से अमेरिका के तीन F-15E स्ट्राइक ईगल विमानों को भी निशाना बनाया। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए विमान यात्रा अब चुनौतीपूर्ण हो गई है क्योंकि एमिरेट्स और एतिहाद जैसी कंपनियों ने अपनी उड़ानें सीमित कर दी हैं। जॉर्डन ने सुरक्षा कारणों से अपना हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से बंद कर दिया है जिससे भारत और खाड़ी देशों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी हो रही है।
तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार का ताजा हाल
इस हमले के तुरंत बाद वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई है और जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने लगी हैं। तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने की आशंका से आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ सकता है। बाजार के ताजा आंकड़ों को नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है।
| सेक्टर | बदलाव का विवरण | ताजा रेट/असर |
|---|---|---|
| कच्चा तेल (Brent) | 9 से 13 प्रतिशत की वृद्धि | 82.37 डॉलर प्रति बैरल |
| नेचुरल गैस | 38 से 50 प्रतिशत की तेजी | यूरोपीय बाजारों में भारी उछाल |
| स्टॉक मार्केट | Nikkei और DAX में गिरावट | वैश्विक मंदी का संकेत |
| हवाई यात्रा | उड़ानों का निलंबन | टिकट दरों में बढ़ोतरी की संभावना |
ईरानी रेड क्रिसेंट ने अब तक देश में 555 लोगों की जान जाने की पुष्टि की है। इसके अलावा कुवैत और यूएई में भी मिसाइलों के मलबे गिरने से नुकसान की खबरें आई हैं। IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है क्योंकि परमाणु केंद्रों पर हमले से रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा बढ़ सकता है। अमेरिका और इजरायल ने इन सैन्य ऑपरेशनों को अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है।




