कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के पार पहुंचा, खाड़ी देशों में युद्ध के चलते सप्लाई ठप होने का डर
वैश्विक तेल बाजार में 3 मार्च 2026 को बड़ी हलचल देखी गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और समुद्री रास्तों के बंद होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड अब 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है। सऊदी अरब और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट पर पड़ता दिख रहा है जिससे आने वाले दिनों में आम जनता और प्रवासियों की जेब पर भारी बोझ पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों और बाजार का ताजा हाल
बाजार के आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी WTI दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। यह लगातार तीसरा दिन है जब तेल की कीमतें बढ़त के साथ बंद हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सप्लाई में इसी तरह की रुकावट रही तो कीमतें 100 डॉलर तक जा सकती हैं।
| तेल का प्रकार | ताजा कीमत (प्रति बैरल) | बढ़ोतरी (प्रतिशत में) |
|---|---|---|
| ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) | $80.39 – $80.89 | 3.1% से 4.1% |
| अमेरिकी WTI | $73.78 | 3.6% |
तेल की कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बिगड़ते हालात इस उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण हैं। सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफाइनरी रास तनुरा (Ras Tanura) पर ड्रोन हमले के बाद वहां काम रुक गया है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल यातायात ठप हो गया है।
- ईरान और इजरायल के बीच युद्ध तेज होने से समुद्री बीमा कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र में कवरेज कम कर दी है।
- सऊदी अरब की रिफाइनरी बंद होने से हर दिन 5.5 लाख बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है।
- मार्केट एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक तनाव रहने पर कीमतें 120 से 150 डॉलर तक जा सकती हैं।
- अमेरिका और अन्य विकसित देश स्थिति को संभालने के लिए अपने तेल भंडार से मदद लेने की योजना बना रहे हैं।
आम आदमी और प्रवासियों पर क्या होगा इसका असर?
तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई पर पड़ेगा। यूएई सरकार ने मार्च 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में पहले ही इजाफा कर दिया है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह महंगाई का संकेत है क्योंकि ईंधन महंगा होने से खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। गोल्डमैन सैक्स जैसी संस्थाओं का मानना है कि इस अनिश्चितता के चलते वैश्विक महंगाई दर में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।




