US Navy ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को श्रीलंका के पास डुबोया, 87 नौसैनिकों की मौत के बाद कच्चे तेल के दाम बढ़े
मंगलवार की रात और बुधवार की सुबह अमेरिकी नौसेना की एक सबमरीन ने हिंद महासागर में बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में अमेरिकी टारपीडो ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को हमला कर डुबो दिया। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 101 सदस्य अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने इस स्ट्राइक की पुष्टि करते हुए इसे Operation Epic Fury का हिस्सा बताया है।
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हमले और नुकसान से जुड़ी मुख्य जानकारी
Pentagon द्वारा जारी किए गए वीडियो में Mark 48 भारी टारपीडो को ईरानी फ्रिगेट से टकराते हुए देखा जा सकता है। यह जहाज भारत में एक अभ्यास से लौट रहा था तभी इसे निशाना बनाया गया। इस पूरी सैन्य कार्रवाई में हुए नुकसान और बचाव कार्य का विवरण नीचे दिया गया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| जहाज का नाम | IRIS Dena (ईरानी युद्धपोत) |
| हमले की जगह | श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र |
| कुल क्रू की संख्या | 180 नौसैनिक |
| पुष्ट मौतें | 87 सैनिक |
| बचाए गए लोग | 32 सदस्य |
| लापता सदस्य | 101 से अधिक |
| ऑपरेशन का नाम | Operation Epic Fury |
दुनिया पर असर और कानूनी विवाद
इस घटना के बाद से वैश्विक शेयर बाजारों में हलचल है और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोत्तरी देखी गई है। व्यापारिक जहाजों के रूट पर खतरा बढ़ने की आशंका से निवेशक परेशान हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत विवादित हो सकता है क्योंकि जहाज ईरान की सीमा से लगभग 1,000 मील दूर था और उस समय किसी हमले की स्थिति में नहीं था।
- Pete Hegseth के अनुसार अमेरिका का लक्ष्य ईरान की पूरी नौसेना को समाप्त करना है।
- Gen. Dan Caine ने दावा किया है कि अमेरिका अब तक ईरान के 20 से ज्यादा जहाजों को नष्ट कर चुका है।
- श्रीलंका की नौसेना मौके पर बचाव अभियान चला रही है और लापता लोगों की तलाश जारी है।
- अमेरिकी सीनेट अब ईरान पर हो रहे हमलों के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य करने पर वोटिंग करेगी।
- खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर इस तनाव का सीधा असर पड़ने की संभावना है।




