ईरान के राष्ट्रपति ने मांगी माफ़ी पर नहीं रुक रहे हमले, सऊदी और दुबई में बढ़ी टेंशन
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने गल्फ देशों पर हुए हमलों के लिए आधिकारिक तौर पर माफ़ी मांगी है। उन्होंने कहा कि अंतरिम परिषद ने तय किया है कि अब पड़ोसी देशों पर कोई हमला नहीं होगा। लेकिन इस बयान के बावजूद शनिवार को बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान की सेना पर सरकार का पूरा कंट्रोल है या नहीं।
सऊदी अरब और दुबई में हमलों से कितना नुकसान हुआ?
ताज़ा जानकारी के मुताबिक, बहरीन ने अपनी सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए 86 मिसाइल और 148 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया है। कुवैत में भी पिछले कुछ दिनों में 200 से ज़्यादा मिसाइलें रोकी गई हैं। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) पर ड्रोन की चेतावनी के कारण कुछ समय के लिए उड़ानों को रोकना पड़ा, जिससे यात्रियों को परेशानी हुई। कुवैत में इन हमलों की वजह से अब तक 9 लोगों के मारे जाने की खबर है, जिसमें दो कुवैती सैनिक भी शामिल हैं।
बाज़ार और तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
इस तनाव का सीधा असर आम आदमी की जेब और व्यापार पर देखने को मिल रहा है:
- कच्चा तेल: हमलों के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 10 से 13 प्रतिशत बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गई है।
- शेयर बाज़ार: सऊदी अरब का शेयर बाज़ार खुलते ही 4 प्रतिशत गिर गया। कुवैत ने अपने बाज़ार में कारोबार को अगली सूचना तक रोक दिया है।
- इंश्योरेंस: फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के लिए वार रिस्क इंश्योरेंस 5 मार्च से बंद कर दिया गया है।
- शिपिंग: बड़ी शिपिंग कंपनियों ने होर्मुज स्ट्रेट से अपने जहाजों की आवाजाही रोक दी है।
ईरान सरकार का इस पर क्या कहना है?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बताया है कि उनकी मिलिट्री यूनिट्स अभी अलग-थलग होकर काम कर रही हैं। उन्हें पहले से जो निर्देश मिले थे, वे उसी आधार पर कार्रवाई कर रही हैं और उनका सेंट्रल कमांड से सीधा संपर्क नहीं है। इसीलिए राष्ट्रपति के आदेश के बाद भी हमले नहीं रुक रहे। उधर, अमेरिका और खाड़ी देशों ने संयुक्त बयान में अपनी आत्मरक्षा के अधिकार की बात दोहराई है और हालात पर नज़र बनाए हुए हैं।





