IMF ने दी बड़ी चेतावनी, युद्ध के कारण तेल की कीमतों में 50% का उछाल, दुनिया भर में बढ़ेगी महंगाई
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अगर और लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई में भारी इजाफा देखने को मिलेगा। 9 मार्च 2026 को जापान में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि इस संकट से आम लोगों और सरकारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
तेल की कीमतों में भारी उछाल और महंगाई का खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों का आना-जाना 90% तक गिर चुका है। इसका सीधा असर एशिया और यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। दिसंबर 2025 के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% की बढ़ोतरी हो चुकी है। बाजार में ब्रेंट क्रूड 93 डॉलर और WTI 92 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है। इसके साथ ही यूरोप में नेचुरल गैस के दाम भी 38% बढ़ गए हैं।
आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा
IMF के आंकड़ों के अनुसार अगर तेल की कीमतों में 10% की लगातार वृद्धि होती है, तो वैश्विक महंगाई में 0.4% का इजाफा होता है। इसके अलावा ग्लोबल GDP में 0.1% से 0.2% की गिरावट आती है। इससे दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों को ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ेंगी जिससे आम आदमी के लिए लोन महंगे हो जाएंगे। गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और एशियाई देशों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा क्योंकि रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।
संकट से निपटने के लिए क्या हो रहे हैं बदलाव
इस अनिश्चितता के दौर में IMF 50 देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि उन देशों की आर्थिक मदद की जा सके जिनका खजाना खाली हो रहा है। वहीं पाकिस्तान जैसे देशों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रहे बदलावों को देखते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम अब हर हफ्ते तय करने का फैसला लिया है। क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने सभी देशों के सेंट्रल बैंकों से कहा है कि वे किसी भी तरह के आर्थिक झटके के लिए पहले से तैयार रहें और स्थिति के अनुसार नीतियां बनाएं।





