GCC Countries Update: खाड़ी देशों में 35 मिलियन विदेशी वर्कर, 2026 में प्रवासियों के लिए लागू हुए नए नियम
खाड़ी देशों में रहने और काम करने वाले लोगों को लेकर एक नया आंकड़ा सामने आया है। ताज़ा आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार छह GCC देशों (सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन) की कुल आबादी लगभग 62 मिलियन हो गई है। इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि आधे से ज़्यादा यानी करीब 35 मिलियन लोग विदेशी वर्कर हैं। इनमें एक बहुत बड़ी संख्या भारतीयों की है जो रोज़गार के लिए इन देशों में रहते हैं।
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किस खाड़ी देश में कितने विदेशी वर्कर रहते हैं?
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक खाड़ी देशों की आबादी काफी तेज़ी से बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण वहां काम करने वाले प्रवासी हैं।
- UAE और कतर: यहां की कुल आबादी में लगभग 88 से 90 प्रतिशत लोग विदेशी हैं।
- कुवैत: यहां के करीब 66 प्रतिशत लोग दूसरे देशों से आए प्रवासी हैं।
- बहरीन और ओमान: इन दोनों देशों में विदेशी वर्कर की संख्या लगभग 50 प्रतिशत है।
- सऊदी अरब: क्षेत्र के सबसे बड़े देश में एक तिहाई (करीब 33 प्रतिशत) लोग विदेशी हैं।
2026 में कामगारों के लिए कौन से नए नियम लागू हुए?
विदेशी वर्करों के लिए 2026 में कई नए लेबर और वीज़ा नियम लागू किए गए हैं जिनका सीधा असर आम प्रवासियों पर पड़ेगा।
- GCC यूनिफाइड लेबर लॉ: 1 जनवरी 2026 से पूरे क्षेत्र में एक समान लेबर नियम लागू किए गए हैं जिसमें एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट को ऑनलाइन रखना अनिवार्य किया गया है।
- सऊदी अरब में जुर्माना: बिना परमिट वाले वर्कर को काम पर रखने पर 10,000 रियाल का जुर्माना लगेगा। अगर कोई कंपनी वर्कर का पासपोर्ट या इकामा अपने पास रखती है तो उसे प्रति वर्कर 3,000 रियाल का फाइन देना होगा।
- ओमान फैमिली वीज़ा: ओमान ने विदेशी नागरिकों के लिए अपने परिवार को स्पॉन्सर करने की न्यूनतम सैलरी लिमिट 350 OMR से घटाकर 150 OMR कर दी है।
- नया GCC वीज़ा: 2026 के अंत तक यूरोप के शेंगेन वीज़ा की तरह सिंगल वीज़ा सिस्टम का ट्रायल शुरू होगा जिसकी फीस 100 से 150 डॉलर के बीच हो सकती है।
मौजूदा क्षेत्रीय विवाद और प्रवासियों की सुरक्षा
खाड़ी क्षेत्र में चल रहे हालिया तनाव के कारण कई देशों ने सुरक्षा को लेकर एहतियात बरतना शुरू कर दिया है। UAE के मानव संसाधन मंत्रालय ने प्राइवेट सेक्टर के लिए रिमोट वर्क की गाइडलाइन जारी रखी है। इसके अलावा बहरीन में भी राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र को लेकर इमरजेंसी नियम एक्टिव हैं। भारत सरकार और अन्य देश अपने नागरिकों की सुरक्षा की लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि ज़रूरत पड़ने पर सही कदम उठाया जा सके।




