US-Iran War: ईरान से जंग में अमेरिका को भारी नुक़सान, 7 सैनिक मरे, Epstein फाइल्स से जुड़ रहे तार
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को 11 दिन हो चुके हैं और अब इसके नतीजे काफी गंभीर नजर आ रहे हैं। पेंटागन ने पुष्टि की है कि इस संघर्ष में अब तक 7 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। कुवैत के ऊपर अमेरिकी सेना के तीन F-15 फाइटर जेट भी फ्रेंडली फायर में क्रैश हो गए हैं। इस बीच अमेरिका के अंदर ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का विरोध शुरू हो गया है। कई अमेरिकी नेता और नागरिक आरोप लगा रहे हैं कि यह युद्ध जेफ्री एपस्टीन की फाइलों (Epstein files) से ध्यान भटकाने के लिए शुरू किया गया है।
क्या ट्रम्प ने Epstein फाइल्स को छुपाने के लिए शुरू किया युद्ध
अमेरिकी मीडिया और कांग्रेस सदस्य आंद्रे कार्सन ने दावा किया है कि ट्रम्प प्रशासन ने जानबूझकर यह जंग छेड़ी है। हाल ही में एफबीआई (FBI) के दस्तावेजों में जेफ्री एपस्टीन के मामले में ट्रम्प पर नए आरोप सामने आए थे। आलोचकों का कहना है कि इसी विवाद से देश का ध्यान भटकाने के लिए ‘ऑपरेशन एपस्टीन डिस्ट्रैक्शन’ के तौर पर युद्ध की घोषणा की गई। एक ताज़ा सर्वे के मुताबिक 56% अमेरिकी नागरिक इस सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। 62% लोगों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन ने बिना किसी साफ़ वजह के इस युद्ध में देश को धकेल दिया है।
युद्ध में अमेरिका और ईरान का कितना हुआ नुकसान
ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के 11वें दिन तक दोनों देशों को भारी नुक़सान उठाना पड़ा है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने पहले 48 घंटों में ही करीब 46,000 करोड़ रुपये (5.6 बिलियन डॉलर) का गोला-बारूद खर्च कर दिया है। इसके अलावा 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और 3 लड़ाकू विमान तबाह हुए हैं। दूसरी ओर ईरान के तेहरान और इस्फहान शहर में भारी बमबारी हुई है। ईरानी रेड क्रिसेंट के डेटा के मुताबिक वहां 1,230 से अधिक लोग मारे गए हैं और 10,000 से अधिक इमारतें तबाह हो गई हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब उनके बेटे मुजतबा खामेनेई ने सर्वोच्च नेता की कमान संभाल ली है।
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर असर
इस युद्ध की आंच अब यूएई और बहरीन तक भी पहुंच गई है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए यूएई पर 15 बैलिस्टिक मिसाइलें और 18 ड्रोन दागे हैं। बहरीन की एक तेल रिफाइनरी में भी हमले के बाद आग लग गई है। हालात को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से अपने राजनयिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाने के बाद फिलहाल 90 डॉलर के करीब हैं। तेल महंगा होने से 74% अमेरिकी नागरिक ईंधन की कीमतों को लेकर चिंतित हैं। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए भी यह स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।




