Israel-Hezbollah Conflict: इजरायल ने लेबनान से बातचीत से किया इंकार, हिजबुल्लाह के हथियार छोड़ने के कोई संकेत नहीं
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहा संघर्ष अब और गहराता जा रहा है। 10 मार्च 2026 को फ्रांस में इजरायल के राजदूत जोशुआ जर्का ने साफ कर दिया है कि लेबनान सरकार की तरफ से हिजबुल्लाह से हथियार वापस लेने का कोई भी संकेत नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इजरायल की तरफ से लेबनान के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए किसी भी तरह की बातचीत का कोई फैसला नहीं लिया गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और आम लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
🚨: Kuwait Oil Price Update: कुवैत के कच्चे तेल में भारी उछाल, एक ही दिन में कीमत 122 डॉलर के पार पहुंची।
लेबनान के राष्ट्रपति का प्रस्ताव और इजरायल का जवाब
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 9 और 10 मार्च 2026 को इजरायल के साथ सीधे बातचीत का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव में कहा गया था कि लेबनान की सेना हिजबुल्लाह के हथियारों को अपने कब्जे में ले लेगी और विवादित इलाकों पर पूरा नियंत्रण करेगी। इस नई पहल के बारे में यूरोपीय संघ के अधिकारियों को भी जानकारी दी गई थी।
हालांकि इजरायल ने इस प्रस्ताव पर कड़ा रुख अपनाया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने लेबनान सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वे हिजबुल्लाह को निहत्था करने के अपने वादे में पूरी तरह फेल रहे हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी 10 मार्च को साफ चेतावनी दी कि अगर लेबनान सरकार ने हालात नहीं संभाले और अपने क्षेत्र पर नियंत्रण नहीं किया तो इसके भयंकर परिणाम हो सकते हैं।
आम नागरिकों पर असर और मौजूदा हालात
इस संघर्ष का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। लेबनान प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 486 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और करीब 6 लाख लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों के बाद से यह संघर्ष काफी तेज हो गया है और इसके बाद हिजबुल्लाह ने भी रॉकेट दागे हैं।
सुरक्षा हालात को देखते हुए बेरूत में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी किया है। लोगों को सुरक्षित जगहों पर रुकने और जरूरी सामान अपने पास रखने को कहा गया है क्योंकि वहां से बाहर निकलने के विकल्प अब सीमित हो रहे हैं। नवंबर 2024 के सीजफायर और UN Resolution 1701 के बावजूद सीमा पर पूरी तरह से शांति बहाल नहीं हो पा रही है और बातचीत फिलहाल रुकी हुई है।





