UAE, सऊदी और कतर की सुरक्षा के लिए आ रहे यूक्रेनी एक्सपर्ट्स, ड्रोन हमलों से निपटने में करेंगे मदद
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने घोषणा की है कि यूक्रेन अपने सैन्य विशेषज्ञों की तीन विशेष टीमें कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब भेज रहा है। ये टीमें इन खाड़ी देशों को ईरानी मूल के Shahed ड्रोन से बचाव के तरीकों पर सलाह देंगी। रूस के साथ चल रहे युद्ध के दौरान यूक्रेन ने इन ड्रोन को रोकने का काफी अनुभव हासिल किया है, जो अब खाड़ी देशों के लिए उपयोगी साबित होगा।
खाड़ी देशों में क्यों आ रही है यूक्रेन की मिलिट्री टीमें?
खाड़ी देशों में तेल रिफाइनरियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर होने वाले ड्रोन हमलों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार, ये टीमें इसी हफ्ते से अपने संबंधित देशों में काम शुरू कर देंगी। इससे पहले मार्च में यूक्रेन ने जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर भी अपने विशेषज्ञ और इंटरसेप्टर ड्रोन भेजे थे। यूक्रेन का मानना है कि उनका अनुभव बड़े ड्रोन हमलों को रोकने में दुनिया में सबसे बेहतर है।
ड्रोन रोकने की तकनीक और खर्च का पूरा विवरण
यूक्रेन की यह विशेषज्ञता खाड़ी देशों को महंगे रक्षा उपकरणों के बजाय सस्ते विकल्पों की जानकारी देगी। उदाहरण के लिए, एक Shahed ड्रोन की कीमत करीब 50,000 डॉलर होती है, जबकि उसे गिराने वाली पारंपरिक मिसाइलें बहुत महंगी पड़ती हैं।
| उपकरण का नाम | अनुमानित कीमत |
|---|---|
| Shahed ड्रोन (ईरानी) | ~$50,000 |
| PAC-3 इंटरसेप्टर मिसाइल | ~$1.2 करोड़ डॉलर |
| यूक्रेनी इंटरसेप्टर ड्रोन (Sting) | ~$2,500 |
यूक्रेन के पास “Sting” जैसे विशेष ड्रोन हैं जो दुश्मन के ड्रोन से टकराकर उन्हें हवा में ही नष्ट कर देते हैं। यूक्रेन अपनी इस तकनीक और सॉफ्टवेयर को साझा करने के बदले में अपने पैट्रियट डिफेंस सिस्टम के लिए मिसाइलों की मांग कर रहा है।
आम लोगों और प्रवासियों पर इसका प्रभाव
कतर, सऊदी अरब और UAE में लाखों की संख्या में भारतीय और अन्य विदेशी प्रवासी काम करते हैं। ड्रोन हमलों से तेल उत्पादन और शिपिंग रूट्स प्रभावित होते हैं, जिससे सुरक्षा का खतरा पैदा होता है। यूक्रेन के विशेषज्ञों की मौजूदगी से इन क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत होगी। इससे वहां रहने वाले प्रवासियों को सुरक्षित माहौल मिलेगा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भी स्थिरता आएगी। जेलेंस्की ने स्पष्ट किया है कि यूक्रेन अपनी उस तकनीक को बेचने के लिए तैयार है जिसकी जरूरत फिलहाल उनकी अपनी सीमाओं पर नहीं है।





