Iran Attack Update: ईरान के IRGC ने अमेरिकी ठिकानों पर किया बड़ा हमला, ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत लगातार दागीं मिसाइलें
ईरान की सेना आईआरजीसी (IRGC) ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर एक बड़ा हमला किया है. यह हमला ‘ट्रू प्रॉमिस 4’ ऑपरेशन के 39वें वेव का हिस्सा है. आईआरएनए न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई शहीद जनरल अमीर मौसवी और अन्य कमांडरों की याद में की गई है. इस भारी हमले के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ गया है, जिससे खाड़ी देशों में सफर करने वाले प्रवासियों और ग्लोबल शिपिंग के लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है.
ईरान का नया ‘स्ट्राइक आफ्टर स्ट्राइक’ प्लान क्या है?
ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. अधिकारियों ने बताया कि अब ‘जवाबी कार्रवाई’ की जगह ‘स्ट्राइक आफ्टर स्ट्राइक’ (लगातार हमले) की नीति अपनाई जा रही है. जब तक विरोधी पूरी तरह से सरेंडर नहीं कर देते, तब तक यह हमले जारी रहेंगे. आईआरजीसी ने जानकारी दी कि इन हमलों को कई लेयर में किया जा रहा है. यह हमले कई घंटों तक चलते हैं ताकि दुश्मन का डिफेंस सिस्टम काम करना बंद कर दे. इन हमलों का कोड नाम “या अमीर अल-मोमिनीन” रखा गया है.
हमले में किन मिसाइलों और ठिकानों को बनाया गया निशाना?
इस ऑपरेशन में ईरान ने भारी और सटीक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है. इनमें खुर्रमशहर-4, खैबर शेकन, कद्र, इमाद और हाइपरसोनिक फतह मिसाइल शामिल हैं. खुर्रमशहर-4 मिसाइल दो टन का वारहेड ले जाने में सक्षम है. 39वें वेव के साथ-साथ 37वें और 38वें वेव में भी कई अहम ठिकानों पर स्ट्राइक हुई.
- बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के 5th Fleet पर हमला हुआ.
- इराकी कुर्दिस्तान के एरबिल में स्थित अमेरिकी बेस को निशाना बनाया गया.
- तेल अवीव के दक्षिण में मौजूद स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन सेंटर पर भी मिसाइलें दागी गईं.
गल्फ में रहने वाले प्रवासियों और फ्लाइट्स पर असर
इस लगातार हमले का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले और काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों पर पड़ सकता है. होर्मुज के रास्ते में तनाव काफी बढ़ गया है, जिससे ग्लोबल शिपिंग और एनर्जी सप्लाई पर खतरा बना हुआ है. सुरक्षा को देखते हुए कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए नई ट्रैवल गाइडलाइंस जारी की हैं. जो लोग खाड़ी देशों में अक्सर सफर करते हैं, उन्हें उड़ानों में देरी या रूट में बदलाव जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.




