Saudi Port Update: खाड़ी देशों के कंटेनर अब सीधे जेद्दा पोर्ट पहुंचेंगे, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी का बड़ा फैसला
सऊदी अरब ने खाड़ी देशों के लिए आ रहे शिपिंग कंटेनरों को अपने जेद्दा इस्लामिक पोर्ट पर रिसीव करना शुरू कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण यूएई, कुवैत, कतर और बहरीन जाने वाले कंटेनरों को अब जेद्दा की तरफ मोड़ा जा रहा है। इसका मकसद गल्फ देशों में खाने-पीने और दवाइयों जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई चैन को बिना किसी रुकावट के चालू रखना है। नेशनल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स रणनीति के तहत जेद्दा को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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नए रूट और पोर्ट पर क्या तैयारियां की गई हैं?
इस बड़े बदलाव को संभालने के लिए सऊदी पोर्ट्स अथॉरिटी (MAWANI) ने तुरंत दो नए इंटरनेशनल समुद्री रूट चालू किए हैं। इसमें Maersk और Hapag-Lloyd जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। इन नए रूट से हर ट्रिप में लगभग 17,000 TEU कंटेनरों को संभालने की क्षमता बढ़ गई है।
कस्टम विभाग (ZATCA) ने भी जेद्दा पोर्ट और जमीनी बॉर्डर पर 24 घंटे काम करना शुरू कर दिया है ताकि सामान की चेकिंग और क्लियरेंस में कोई देरी ना हो। इसके अलावा ट्रकों की आवाजाही को कंट्रोल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक शेड्यूलिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। ग्लोबल कैरियर कंपनियों ने भी जेद्दा को माल उतारने के लिए एक सुरक्षित पोर्ट घोषित किया है।
कस्टम चार्ज और सप्लाई पर इसका क्या असर होगा?
रूट बदलने की वजह से कुछ नए चार्ज भी लागू किए गए हैं। प्रमुख शिपिंग कंपनियों जैसे MSC ने जेद्दा में उतारे जाने वाले हर कंटेनर पर 800 डॉलर का डायवर्जन सरचार्ज लगाया है। इसके अलावा युद्ध के खतरे को देखते हुए 1,500 से 3,000 डॉलर तक का वार रिस्क सरचार्ज भी लिया जा रहा है। हालांकि जीसीसी (GCC) सदस्य देशों के सामान पर लगने वाली कस्टम छूट पहले की तरह ही लागू रहेगी।
आम लोगों और प्रवासियों के लिए राहत की बात यह है कि लैंड ब्रिज के जरिए सऊदी और पड़ोसी देशों में जरूरी सामान पहुंचता रहेगा जिससे बाजार में चीजों की कमी नहीं होगी। वहीं सऊदी अरामको ने भी अपने कच्चे तेल के निर्यात को लाल सागर के यनबू पोर्ट पर शिफ्ट कर दिया है ताकि ऊर्जा सप्लाई में कोई रुकावट ना आए।




