Australia का बड़ा फैसला, ईरान के हमलों से UAE को बचाने के लिए भेज रहा है मिसाइल और घातक विमान
10 मार्च 2026 को ऑस्ट्रेलिया ने मिडिल ईस्ट में बढ़ती टेंशन के बीच एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने घोषणा की है कि ऑस्ट्रेलिया अपनी वायु सेना का बोइंग E-7A वेजेटेल निगरानी विमान और मीडियम रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (AMRAAMs) संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेज रहा है। यह तैनाती 4 हफ्ते के शुरुआती मिशन के लिए की जा रही है ताकि खाड़ी देशों को ईरान की तरफ से हो रहे हवाई हमलों से बचाया जा सके।
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UAE की सुरक्षा के लिए क्यों उठाया गया यह कदम?
UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने इस सुरक्षा के लिए मदद मांगी थी। हाल ही के दिनों में UAE ने 1500 से ज्यादा रॉकेट और ड्रोन हमलों को हवा में ही नाकाम किया है। मिडिल ईस्ट में लगभग 1 लाख 15 हजार और सिर्फ UAE में 24 हजार से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई नागरिक रहते हैं। प्रधानमंत्री का कहना है कि इन लोगों की सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस मिशन के तहत ऑस्ट्रेलिया का कोई भी सैनिक ईरान की जमीन पर नहीं जाएगा।
क्या-क्या भेज रहा है ऑस्ट्रेलिया?
इस मिशन में ऑस्ट्रेलिया अपने 85 वायु सेना (RAAF) और रक्षा बल के जवानों को UAE भेज रहा है। यह विमान मार्च 2026 के मध्य में उड़ान भरेगा और वीकेंड तक काम करना शुरू कर देगा। इसके साथ ही उन्नत मिसाइलें (Raytheon AIM-120) भी दी जा रही हैं। रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने इस बात की पुष्टि की है कि यह मिशन पूरी तरह से संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत केवल बचाव के लिए है।
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर क्या होगा असर?
इस तरह के मजबूत सुरक्षा इंतजामों से UAE और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य देशों के प्रवासियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। ईरान और अन्य गुटों के हमलों के कारण मिडिल ईस्ट में लगातार खतरा बना हुआ है। हवा में मंडराते इस खतरे को खत्म करने के लिए यह ऑस्ट्रेलियाई विमान लम्बी दूरी की निगरानी करेगा। इससे दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में काम कर रहे लाखों आम लोगों की सुरक्षा और पुख्ता होगी।




