Trump का ईरान पर बड़ा बयान, हमले अभी ख़त्म नहीं हुए, तेल कंपनियों को दी Strait of Hormuz इस्तेमाल करने की सलाह
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर चल रहे सैन्य हमलों को लेकर स्पष्ट किया है कि अभी अभियान ख़त्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि ईरान पिछले 47 सालों से दुनिया को जो नुकसान पहुंचा रहा है, उसकी बड़ी कीमत चुका रहा है. 12 मार्च 2026 को दिए अपने बयान में ट्रम्प ने तेल कंपनियों से कहा कि वे Strait of Hormuz का दोबारा इस्तेमाल शुरू करें. उनका दावा है कि अमेरिकी नौसेना ने ईरान के ज़्यादातर माइंस बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया है.
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ईरान में अमेरिकी हमले और Strait of Hormuz का ताज़ा हाल
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की रिपोर्ट के अनुसार एक ही रात में ईरान के 16 माइंस बिछाने वाले जहाजों को तबाह कर दिया गया. 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अब तक 5,500 से ज़्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया है. ट्रम्प ने तेल कंपनियों को इस रास्ते से व्यापार शुरू करने को कहा है, लेकिन अमेरिकी समुद्री प्रशासन (MARAD) ने अभी भी जहाज़ों को इस इलाके से दूर रहने की सलाह दी है. व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी प्रशासन जहाज़ों को पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस भी दे रहा है. इस बीच दक्षिणी ईरान में एक स्कूल पर हमले में 175 लोगों की मौत की खबर आई है, जिसे ट्रम्प ने ईरान के ही गलत हथियारों का नतीजा बताया है.
कच्चे तेल की कीमत और भारत के लिए फैसले
इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. हालात को देखते हुए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इमरजेंसी रिज़र्व से 400 मिलियन बैरल तेल निकालने का रिकॉर्ड फैसला लिया है. इसके बाद तेल की कीमतें गिरकर 87 से 90 डॉलर के बीच आ गई हैं. भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उन्होंने अपना 70 प्रतिशत कच्चा तेल Strait of Hormuz के बाहर से सुरक्षित कर लिया है. इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भारतीय रिफाइनर्स को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की विशेष छूट भी दी है.
खाड़ी देशों में रहने वालों पर क्या होगा असर
अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान ने दुबई, सऊदी अरब और बहरीन में मौजूद अंतरराष्ट्रीय बैंकों और वित्तीय केंद्रों को निशाना बनाने की धमकी दी है. यह खबर खाड़ी देशों में रहने और काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए चिंता का विषय बन सकती है. इस पूरे विवाद पर UN सुरक्षा परिषद ने 13-0 से एक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें ईरान से खाड़ी देशों पर हमले तुरंत रोकने की मांग की गई है. इस वोटिंग में चीन और रूस ने हिस्सा नहीं लिया.





