Britain Reaction: सऊदी अरब पर ईरान के हमले का ब्रिटेन ने किया कड़ा विरोध, 63000 नागरिकों को वापस बुलाया
ब्रिटेन ने सऊदी अरब पर ईरान द्वारा किए गए हमलों का कड़ा विरोध किया है। 12 मार्च 2026 को ब्रिटेन की विदेश सचिव Yvette Cooper ने सऊदी अरब का दौरा किया और इन हमलों को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया। इस घटना के बाद गल्फ देशों में तनाव की स्थिति बन गई है जिसका सीधा असर वहां काम करने वाले विदेशी प्रवासियों और कंपनियों पर देखा जा रहा है।
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सऊदी अरब में क्या है मौजूदा स्थिति
बीते 24 घंटों में सऊदी अरब के एयर डिफेंस ने कई ड्रोन हमलों को रास्ते में ही रोक दिया। रियाद के Diplomatic Quarter और Shaybah oil field की तरफ ड्रोन दागे गए थे जिन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया गया। अब तक गल्फ देशों में इन हमलों के कारण 12 आम नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें सऊदी अरब में काम करने वाले दो विदेशी वर्कर भी शामिल हैं।
सऊदी कैबिनेट ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में एक बैठक की। इसमें साफ किया गया कि सऊदी अरब अपनी संप्रभुता और देश की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। इसके अलावा सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान लगातार मिस्र, ओमान, बहरीन और EU के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं।
विदेशी नागरिकों और कंपनियों पर पड़ा असर
गल्फ देशों में काम कर रहे विदेशी नागरिकों के लिए यह समय थोड़ी चिंता का है। ब्रिटेन ने सुरक्षा कारणों से अपने 63,000 नागरिकों को वहां से वापस बुला लिया है। UAE और ओमान से ब्रिटेन के लिए पांच विशेष चार्टर फ्लाइट्स रवाना हो चुकी हैं और आगे भी कई फ्लाइट्स शेड्यूल हैं।
हमलों की वजह से व्यापार पर भी असर पड़ा है। कई बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां जैसे PwC और Deloitte ने एहतियात बरतते हुए सऊदी अरब और UAE में अपने दफ्तर फिलहाल बंद कर दिए हैं। इससे पहले रियाद में अमेरिकी दूतावास और Ras Tanura रिफाइनरी को भी नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई थी।
UN सिक्योरिटी काउंसिल का फैसला
ईरान के इन हमलों के खिलाफ UN Security Council में एक प्रस्ताव पास किया गया है। 15 में से 13 सदस्य देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस शामिल हैं। कुल 135 देशों ने ईरान के इन कदमों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का समर्थन किया है।
इस बीच ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए IEA ने अपने रिजर्व से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है। ब्रिटेन और सऊदी अरब ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं ताकि आम लोगों तक तेल की सप्लाई बनी रहे।




