यमन में नए युद्ध और अमेरिकी प्रतिबंधों का खौफ, लोग हवाई हमलों से ज्यादा भुखमरी से डरे
अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, यमन में एक नए युद्ध का खौफ लोगों के बीच गहरा गया है। यहां के आम नागरिक अब हवाई हमलों से ज्यादा अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकाबंदी (blockade) से डरने लगे हैं। पिछले युद्ध में तबाह हुए घरों में रह रहे यमन के लोग एक बार फिर से भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। हालिया क्षेत्रीय संघर्ष और अमेरिका की तरफ से लगाए गए नए प्रतिबंधों के कारण हालात और भी गंभीर हो गए हैं।
अमेरिकी प्रतिबंध और अर्थव्यवस्था पर असर
16 जनवरी 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (OFAC) ने हूती नेटवर्क पर अब तक का सबसे बड़ा प्रतिबंध लगाया था। इसके साथ ही अमेरिका ने 3 मार्च 2026 को यमन के लिए अस्थायी संरक्षित स्थिति (TPS) को खत्म करने की घोषणा की, जो 4 मई 2026 को पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इन फैसलों के कारण यमन में आयात पर भारी असर पड़ा है। बाजार में खाने-पीने की चीजें, ईंधन और बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि आम लोग अपनी कमाई का लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा केवल खाने पर खर्च करने को मजबूर हैं।
मानवीय संकट और भुखमरी के आंकड़े
संयुक्त राष्ट्र और अन्य आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, यमन में मानवीय संकट बहुत बड़े स्तर पर पहुंच चुका है। देश अपना 90 प्रतिशत भोजन आयात करता है, इसलिए नाकाबंदी का सीधा असर आम आदमी के जीवित रहने पर पड़ रहा है।
- देश की 65.4 प्रतिशत आबादी (लगभग 2.31 करोड़ लोग) को तत्काल सहायता की जरूरत है।
- 1.8 करोड़ लोग गंभीर भुखमरी और खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
- लगभग 64 प्रतिशत परिवार अपनी रोजाना की न्यूनतम खाने की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
- हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में भोजन की कीमतें वैश्विक स्तर से काफी ज्यादा हो गई हैं।
लाल सागर में फिर से तनाव की आशंका
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण हूती अधिकारियों ने लाल सागर में फिर से समुद्री हमले शुरू करने के संकेत दिए हैं। ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने भी बयान दिया है कि यमन क्षेत्रीय संघर्ष में अपना काम करेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का कहना है कि अमेरिका हूती नेटवर्क को रोकने के लिए सभी विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, हूती प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुलसलाम ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी प्रतिबंधों से पीछे नहीं हटेंगे। इसके कारण आम यमनियों को डर है कि अगर लाल सागर में फिर से टकराव शुरू हुआ, तो देश में बुनियादी चीजों की पूरी तरह कमी हो जाएगी।




