Iran का बड़ा फैसला, Strait of Hormuz से गुजरने के लिए अब चीनी युआन में करना होगा तेल व्यापार
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ग्लोबल ऑयल मार्केट को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। 14 मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान Strait of Hormuz से सिर्फ उन्हीं तेल जहाजों को गुजरने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है जो चीनी युआन (CNY) में व्यापार करेंगे। CNN ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है, हालांकि Al Jazeera ने अभी इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।
ईरान का नया नियम और जहाजों की चालाकी
ईरान की इस लिमिटेड एक्सेस नीति का सीधा मतलब है कि तेल के व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर की जगह चीनी युआन का इस्तेमाल करना होगा।
इस नए नियम के कारण समंदर में चलने वाले जहाजों ने एक नया तरीका अपना लिया है।
कई जहाजों ने अपने AIS (Automated Identification System) पर CHINA OWNER या CHINA OWNER & CREW का सिग्नल लगाना शुरू कर दिया है।
ईरान आमतौर पर उन जहाजों को निशाना नहीं बनाता जिनका संबंध चीन से होता है।
ईरान की सेना IRGC ने दावा किया है कि Strait of Hormuz के पानी, हवा और जमीन पर उनका पूरी तरह से नियंत्रण है।
ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर कितना असर पड़ा है
Strait of Hormuz दुनिया के तेल व्यापार के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता है।
सामान्य दिनों में दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल और एक तिहाई LNG इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है।
28 फरवरी 2026 को तनाव बढ़ने के बाद से इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही में 90 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन में Kharg Island पर हुए हमलों के बाद ईरान ने इस रास्ते को बंद करने का कदम उठाया है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने 12 मार्च को स्पष्ट किया था कि दुश्मनों के खिलाफ इस रास्ते को बंद करने के विकल्प का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
चीन सरकार का इस पूरे मामले पर क्या रुख है
इस पूरी रणनीति में चीन सबसे अहम भागीदार बन गया है क्योंकि व्यापार चीनी युआन में होना है।
दूसरी तरफ चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Mao Ning ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग है और ग्लोबल एनर्जी को सुरक्षित रखने के लिए सैन्य अभियानों को रोका जाना चाहिए।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी चेतावनी दी है कि इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है।
वर्तमान समय में केवल कुछ ही जहाज इस रास्ते को सुरक्षित पार कर पा रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर का संबंध चीन या ईरान से है।




