US-Iran War: अमेरिका ने ईरान पर किया ‘No Mercy’ का ऐलान, मानवाधिकार संगठनों ने जताई कड़ी आपत्ति
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इसी बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान पर कोई रहम (no mercy) नहीं दिखाएगा। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने कड़ी आपत्ति जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के दौरान इस तरह की धमकियां देना हेग कन्वेंशन और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।
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क्या कहा अमेरिका के रक्षा मंत्री ने?
13 मार्च को पेंटागन की एक प्रेस ब्रीफिंग में Pete Hegseth ने कहा कि हम आगे बढ़ते रहेंगे और अपने दुश्मनों को कोई रहम नहीं दिखाएंगे। उन्होंने युद्ध के पुराने नियमों को बेकार बताया और कहा कि अमेरिका अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करेगा। इस बयान का राष्ट्रपति Donald Trump ने भी समर्थन किया है। ट्रंप ने ईरानी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि आने वाले हफ्ते में ईरान पर और भी कड़े प्रहार किए जाएंगे।
पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने पिछले 14 दिनों में ईरान के 15,000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है। उनका दावा है कि ईरान की 90 प्रतिशत मिसाइल और नौसेना की ताकत खत्म कर दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कैसे?
कानूनी जानकारों के मुताबिक युद्ध में नो क्वार्टर का मतलब होता है कि दुश्मन अगर सरेंडर भी करे तो उसे मार दिया जाए। हेग कन्वेंशन (1907) और अमेरिका के 1996 War Crimes Act के तहत ऐसा बयान देना गैरकानूनी है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अपने नियम भी इस तरह की घोषणाओं को रोकते हैं।
International Crisis Group और Human Rights Watch जैसे संगठनों ने इस बयान को युद्ध अपराध की तरफ इशारा करने वाला बताया है। अमेरिका के डेमोक्रेटिक सीनेटर Jeff Merkley ने भी इन टिप्पणियों की निंदा की है और आम नागरिकों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई है।
युद्ध में अब तक का नुकसान और आगे की तैयारी
इस युद्ध में अब तक 1,444 ईरानियों की जान जा चुकी है। इसमें Minab के एक स्कूल पर हुआ हमला भी शामिल है जहां 170 से अधिक लोगों की मौत हुई। वहीं अमेरिका के भी कुल 13 जवानों की जान गई है, जिनमें से 6 वायुसैनिक इराक में एक टैंकर क्रैश में मारे गए।
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत और बढ़ा दी है। USS Tripoli और 2,500 मरीन जवानों को इस क्षेत्र में भेजा गया है। इसके अलावा IRIS Dena नाम के ईरानी जहाज के डूबने पर भी सवाल उठ रहे हैं जहां अमेरिकी सेना पर आरोप है कि उन्होंने जिनेवा कन्वेंशन को तोड़ते हुए डूबते लोगों की मदद नहीं की।




