UN Security Council में ईरान के खिलाफ पास हुआ ऐतिहासिक प्रस्ताव, खाड़ी देशों के लिए लिया गया बड़ा फैसला
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा करते हुए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है. गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के महासचिव जसीम मोहम्मद अलबुदैवी ने 14 मार्च 2026 को इस फैसले का स्वागत किया है और इसे एक अहम कदम बताया है. 11 मार्च को पास हुए इस प्रस्ताव में 136 देशों ने अपना समर्थन दिया है, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है. इस फैसले का सीधा असर खाड़ी देशों की सुरक्षा और ग्लोबल इकॉनमी पर पड़ेगा.
प्रस्ताव में क्या खास बातें कही गई हैं?
इस प्रस्ताव (Resolution 2817) के तहत ईरान को अपने सभी हमले तुरंत रोकने का आदेश दिया गया है. इसमें साफ तौर पर बताया गया है कि ईरान के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हैं और इससे वैश्विक शांति को खतरा है.
- UN Charter के आर्टिकल 51 के तहत खाड़ी देशों (सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान) और जॉर्डन को अपनी आत्मरक्षा का पूरा अधिकार दिया गया है.
- प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े, जबकि रूस और चीन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और दूर रहे.
- बहरीन ने GCC और जॉर्डन की तरफ से इस प्रस्ताव का नेतृत्व किया.
खाड़ी देशों के लिए यह फैसला क्यों अहम है?
यह फैसला इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और तेल सप्लाई के लिए बहुत अहम है. GCC महासचिव ने बयान में कहा कि यह प्रस्ताव ईरान की मनमानी पर रोक लगाएगा. Strait of Hormuz से गुजरने वाले समुद्री जहाजों और ग्लोबल सप्लाई चेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह एक बड़ा कदम है. अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट किया कि इस भारी समर्थन के बाद ईरान कूटनीतिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है.
हाल ही में हुए हमले और प्रवासियों पर असर
रिपोर्ट के मुताबिक 14 मार्च को ही सऊदी अरब के एयर डिफेंस ने इलाके की तरफ आ रहे 4 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया. इससे इलाके में चल रहे तनाव का पता चलता है. ईरान के UN एंबेसडर ने इस फैसले को अन्याय कहा है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कड़े प्रस्ताव का पास होना खाड़ी में रहने वाले लोगों और वहां काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. इस फैसले से भविष्य में इलाके में शांति और स्थिरता आने की उम्मीद मजबूत हुई है.




