ईरान का बड़ा ऐलान, होर्मुज जलमार्ग अमेरिकी जहाजों के लिए रहेगा बंद, क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के कारण मध्य पूर्व में स्थिति काफी गंभीर हो गई है। ईरान के एक्सपीडिएंसी काउंसिल के सदस्य मोहसिन रेजाई ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) अमेरिकी जहाजों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। उन्होंने बयान दिया है कि जब तक अमेरिका खाड़ी क्षेत्र से अपनी सेना वापस नहीं बुलाता, तब तक उनके जहाजों को इस रास्ते से गुजरने नहीं दिया जाएगा। इस भारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
भारत के लिए राहत, दो जहाजों को मिली एंट्री
हालांकि यह जलमार्ग अमेरिका और विरोधी देशों के जहाजों के लिए बंद है, लेकिन ईरान चुनिंदा जहाजों को यहां से गुजरने दे रहा है।
नई दिल्ली और तेहरान के बीच उच्च स्तर की बातचीत के बाद 14 मार्च को भारत के दो टैंकर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से इस जलमार्ग से बाहर आ गए।
ये दोनों भारतीय जहाज एलपीजी लेकर जा रहे थे। भारत और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह बड़ी राहत की बात है क्योंकि दुनिया के कुल तेल और एलपीजी आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर जाता है।
अमेरिका का पलटवार और तेल की कीमतों पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग आइलैंड पर मौजूद सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। यह आइलैंड ईरान का मुख्य ऑयल एक्सपोर्ट टर्मिनल है।
अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस ऑपरेशन में अब तक ईरान के 15,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया गया है।
इस युद्ध का सीधा असर वैश्विक बाजार और आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल के दाम 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं।
वहीं दूसरी तरफ यूएई के फुजैरा पोर्ट पर शनिवार सुबह एक ड्रोन हमले के कारण भयंकर आग लग गई। इस वजह से वहां तेल लोडिंग का काम रोकना पड़ा है।
क्या कहते हैं दोनों देशों के नेता
ईरान के नेता मोहसिन रेजाई ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि उनके पास मिसाइलों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा है कि युद्ध तभी खत्म होगा जब उन्हें भविष्य के लिए पूरी सुरक्षा की गारंटी और हर्जाना मिलेगा।
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ने अन्य देशों से इस जलमार्ग को सुरक्षित रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजने की बात कही है। अमेरिका ने यह भी साफ किया है कि उन्होंने अभी तक किसी कमर्शियल जहाज को इस रास्ते से एस्कॉर्ट नहीं किया है।
इस बीच ओमान ने अमेरिका और इजराइल के इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। इस पूरी घटना से खाड़ी देशों में व्यापार और वहां काम करने वाले भारतीयों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।




