UAE में भ्रामक वीडियो पर बड़ा एक्शन, 35 लोग गिरफ्तार, गलती करने पर लगेगा 2 लाख दिरहम का जुर्माना
UAE में सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ने हाल ही में 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर ऐसे वीडियो शेयर करने का आरोप है जो राष्ट्रीय सुरक्षा और शांति के लिए खतरा हो सकते हैं। इन सभी आरोपियों पर तेजी से मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया है।
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कौन से 3 तरह के वीडियो पर हो रही है कार्रवाई?
अधिकारियों ने तीन तरह के वीडियो की पहचान की है जिन पर तुरंत कानूनी एक्शन लिया जा रहा है।
- सेना और डिफेंस के वीडियो: ऐसे वीडियो जिनमें सेना के मूवमेंट, मिसाइल इंटरसेप्शन या मिलिट्री सुविधाओं की असली फुटेज दिखाई गई हो।
- AI से बनाए गए फर्जी वीडियो: डीपफेक या AI की मदद से बनाए गए वीडियो, जिनमें झूठे धमाके, UAE की किसी जगह पर हमले या धुएं जैसी चीजें दिखाई गई हों।
- डर फैलाने वाले वीडियो: ऐसे वीडियो जिनमें बच्चों की भावनाओं का इस्तेमाल कर डर का माहौल बनाया गया हो या भीड़ के वीडियो में डराने वाली आवाजें जोड़ी गई हों।
जुर्माना और प्रवासियों के लिए नियम
UAE के साइबरक्राइम कानून (आर्टिकल 52) के तहत इन गलतियों पर भारी जुर्माना और सजा तय की गई है। अटॉर्नी-जनरल डॉ हमद सैफ अल शम्सी ने साफ कर दिया है कि इंटरनेट का गलत इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- सामान्य सजा: अगर कोई गलत खबर फैलाता है, तो उसे कम से कम एक साल की जेल और 100,000 दिरहम का जुर्माना देना होगा।
- कठोर सजा: आपातकाल या संकट के समय ऐसी अफवाहें फैलाने पर जुर्माना 200,000 दिरहम हो जाता है और कम से कम दो साल की जेल होती है।
- प्रवासियों पर असर: गल्फ में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए नियम सख्त हैं। दोषी पाए जाने पर सजा पूरी होने के बाद विदेशी नागरिकों को अनिवार्य रूप से देश से निकाल दिया जाएगा।
यह कानून केवल वीडियो बनाने वाले पर ही नहीं, बल्कि उस वीडियो को शेयर करने और उस पर कमेंट करने वाले लोगों पर भी बराबर लागू होता है। निवासियों को केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करने की सलाह दी गई है।




