ईरान ने अफगानिस्तान को कहा शुक्रिया, बाग्राम एयरबेस अमेरिका को देने से किया मना
ईरान ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को एक बड़ा धन्यवाद संदेश भेजा है। 13 मार्च 2026 को ईरान के राजदूत हसन काज़मी कोमी ने बाग्राम एयरबेस (Bagram Airbase) को अमेरिका के हवाले न करने के फैसले की तारीफ की। ईरान का कहना है कि भारी दबाव के बावजूद अफगानिस्तान ने जो फैसला लिया है वह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी था। इस कदम से दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों में मजबूती देखी जा रही है।
बाग्राम एयरबेस पर तालिबान ने क्या फैसला लिया है?
अफगानिस्तान के सैन्य प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि देश की एक इंच जमीन भी विदेशी सेना को नहीं दी जाएगी। बाग्राम एयरबेस को लेकर अमेरिका की ओर से लगातार मांग उठ रही थी। डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे चीन के पास होने की वजह से एक बड़ी रणनीतिक गलती बताया था। ईरान के राजदूत ने शमशाद टीवी को दिए इंटरव्यू में बताया कि तालिबान नेतृत्व ने अमेरिका की इन मांगों को ठुकरा कर अपनी बुद्धिमानी का परिचय दिया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर इस फैसले का क्या असर होगा?
ईरान के अनुसार अगर अमेरिका फिर से इस एयरबेस पर आता तो यह पूरे मिडिल ईस्ट और पड़ोसी देशों के लिए एक नया खतरा बन जाता। ईरान ने इसे अपनी रेड लाइन के तौर पर देखा है। इस फैसले के कुछ मुख्य प्रभाव इस प्रकार हैं:
- ईरान और अफगानिस्तान के बीच तनाव कम होगा और आपसी सहयोग बढ़ेगा
- क्षेत्र में किसी भी बाहरी सैन्य दखल को रोकने में मदद मिलेगी
- अफगानिस्तान की संप्रभुता और उसकी स्वतंत्र नीति दुनिया के सामने आएगी
- यह फैसला उन अटकलों को खत्म करता है जिसमें अमेरिका की वापसी की बात कही जा रही थी




