Dubai Property New Rule: दुबई में प्रॉपर्टी मालिकों के लिए 2 नए कानून लागू, 10 लाख दिराम तक का लग सकता है जुर्माना
दुबई में प्रॉपर्टी खरीदना एक बड़ा कदम होता है. लेकिन अब घर या फ्लैट खरीदने वालों के लिए कुछ नए नियम बनाए गए हैं. सरकार ने मार्च 2026 में बिल्डिंग सेफ्टी और शेयर हाउसिंग को लेकर दो नए कानून लागू किए हैं जिनका सीधा असर ‘मैनेज्ड कम्युनिटी’ में रहने वालों पर पड़ेगा. अब मालिकों को क्वालिटी और सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना जरूरी हो गया है. इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है.
नए कानून में प्रॉपर्टी मालिकों के लिए क्या बदला है?
10 मार्च 2026 को जारी हुए नए बिल्डिंग सेफ्टी कानून के तहत अब कंस्ट्रक्शन पूरा होने के बाद ‘क्वालिटी एंड सेफ्टी सर्टिफिकेट’ लेना अनिवार्य है. इसके अलावा, अगर कोई मालिक अपना घर या फ्लैट शेयरिंग बेसिस (Bed Space) पर किराए पर देता है, तो उसे दुबई म्युनिसिपैलिटी और DLD से परमिट लेना होगा.
- सरकार ने इन नियमों को मानने के लिए मार्च 2026 से एक साल का समय दिया है.
- बिल्डिंग में कोई सेफ्टी या मेंटेनेंस से जुड़ी कमी पाई जाती है, तो 100 से लेकर 10 लाख दिराम तक का जुर्माना लग सकता है.
- बार-बार नियम तोड़ने पर यह जुर्माना डबल होकर 20 लाख दिराम तक पहुंच सकता है.
- शेयर हाउसिंग के नियम तोड़ने पर 500 से 5 लाख दिराम तक का फाइन है.
सर्विस चार्ज और Mollak सिस्टम कैसे काम करेगा?
दुबई में प्रॉपर्टी का मैनेजमेंट अब RERA से प्रमाणित ‘मैनेजमेंट कंपनी’ के हाथ में है. कोई भी कंपनी RERA की मंजूरी के बिना सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकती. इसके लिए Mollak सिस्टम बनाया गया है जिससे पूरी पारदर्शिता बनी रहती है और प्रॉपर्टी मालिक केवल असली खर्च के पैसे देते हैं.
| प्रॉपर्टी का प्रकार | सर्विस चार्ज (प्रति स्क्वायर फुट) |
|---|---|
| लग्जरी अपार्टमेंट | 18 से 30+ दिराम |
| मिड-मार्केट अपार्टमेंट | 8 से 15 दिराम |
| प्रीमियम विला | 5 से 15 दिराम |
पेमेंट करते समय इनवॉइस पर RERA का QR कोड होना जरूरी है. अगर कोई मालिक इन नियमों को पूरा नहीं करता है, तो DLD उस प्रॉपर्टी की बिक्री या बिल्डिंग परमिट को रोक सकता है.
डेवलपर की जिम्मेदारी और मालिकों के अधिकार
कानून के मुताबिक अगर बिल्डिंग के स्ट्रक्चर में कोई खराबी आती है, तो 10 साल तक उसे ठीक करने की पूरी जिम्मेदारी बनाने वाले डेवलपर की होती है. इसके साथ ही अंदरूनी फिक्स्चर के लिए यह समय 1 साल रखा गया है.
प्रॉपर्टी मालिकों का एक 9 सदस्यों वाला ‘ओनर्स कमिटी’ (Owners Committee) भी बनता है जो मैनेजमेंट कंपनी के काम पर नजर रखता है. यह कमिटी केवल सलाह दे सकती है और इनके पास सीधे पैसे का कंट्रोल नहीं होता है. कानूनी जानकारों ने सलाह दी है कि पेमेंट करने से पहले मालिकों को DLD पोर्टल पर मैनेजमेंट कंपनी का लाइसेंस जरूर चेक कर लेना चाहिए.




